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सपाई गुंडे पूर्व सांसद अतीक और उसके गुर्गों ने नैनी में मचाया आतंक,पुलिस मौन





इलाहबाद .बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड समेत गुंडागर्दी की सीमा लाघ चुके पूर्व सांसद और सपा प्रत्याशी बाहुबली अतीक अहमद फिर सुर्खियों में है जिसे गुंडा गर्दी की प्रदेश की अखिलेश सरकार ने खुली छुट दे रखी है .
पूर्व की बसपा सरकार में राजनैतिक पतन के शिकार माफिया अतीक अहमद की गुंडई पर बिराम लग गया था और अपराध जगत में अपने को शेर समझने वाला यह माफिया गुमनामी के बिल में घुस गया था परन्तु समाजवादी पार्टी की सरकार के संरक्षण में इस गुंडे ने फिर गुर्गो के साथ अपने फन फैलाना शुरु करते हुए आतंक कायम कर रहा है .
मौत की असामयिक भेट चड़े राजूपाल की पत्नी पूजा पाल ने इस नामी गुंडे अतीक के राजनीतिक भविष्य पर चुनाव में हरा कर लगाम तो लगा दिया था किन्तु समाजवादी नेता शिवपाल ने फिर सपा से टिकट देकर पुनः उस गुंडे माननीय बनाने का ठेका ले लिया है .
प्राप्त जानकारी के अनुसार इलाहबाद के कृषि संस्थान में पूर्व सांसद अतीक अहमद ने अपने गुर्गों के साथ सरेआम मारपीट की, असलहों से लैस अतीक संस्थान में दाखिल होते ही निदेशक, संस्थान के बारे में पूछा और निदेशक के कमरे में पहुँचते ही अतीक के साथ आये बदमाशों ने अपनी गुंडागर्दी दिखानी शुरू कर दी. भद्दी-भद्दी गालियोंके साथ कमरे में मौजूद अधिकारियों को मारना-पीटना शुरू कर दिया. इसके बाद ये सभी लोग कुलपति के कमरे की तरफ बढ़े और वहां भी गालियां देते हुए कुलपति के सहयोगी कर्मचारियों को बुरी तरह मारा पीटा. कृषि संस्थान के सुरक्षा कर्मियो जब बीच बचाव किया तो अतीक के गुर्गो ने उन्हें भी बुरी तरह से मारा –पीता ,अतीक की दिनदहाड़े इस गुंडागर्दी से पुरे कैंपस में भय का माहौल था. असलहों से लैस होने के कारण कोई भी बीच-बचाव करने के लिए नहीं जा सका.
उक्त माफिया अतीक ने इस घटना को अंजाम क्यों दिया इस संदर्भ संस्थान के कर्मियों का कहना है कि कुछ दिन पूर्व एक प्राध्यापक ने दो छात्रों सैफ सिद्दीकी और शाकिब के खिलाफ कैंपस में छेड़छाड़ मामला दर्ज कराया था. छेड़छाड़ के आरोपियों पर लगे इस केस को वापस लेने के लिए अतीक दबाव बना रहे थे. केश वापस न लिए जाने के कारण अतीक अपने दर्जनों असलहाधारी गुर्गो की फ़ौज लेकर कैंपस में धावा बोल दिया और प्राध्यापक तेजस जैकब के कनपट्टी पर बंदूक सटाकर उनका टैबलेट छीन लिया. जैकब को घसीटते ये बदमाश अपने साथ लेकर जाना चाहते थे लेकिन अधिक संख्या में कर्मचारियों के विरोध के बाद इन्होंने जैकब को छोड़ दिया.
निष्काषित छात्र सैफ सिद्दीकी और शाकिब भी अपने आका अतीक के साथ घटना के वक्त आये थे.



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