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गंगा का पानी जहरीला , नमामि गंगे प्रोजेक्ट चढ़ रही भ्रस्ट्राचार की भेट ?

अभिषेक चौधरी ! न्यूज़ अटैक
नई दिल्ली . केंद्र सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया था . केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए बजट को चार गुना करते हुए पर 2019-2020 तक नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी भी दे दी और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दे दिया.

भारतीय धर्मावलम्बियों का मानना है कि गंगा में डुबकी लगाकर उनके सारे पाप ‘धुल’ जायेंगे , लेकिन ये सच सुन कर आप भौचक हो जायेंगे कि केंद्र सरकार ने अरबो की रकम जिस गंगा की सफाई हेतु खर्च किया है उस गंगा का पानी इतना गंदा है कि पीना तो दूर, ये नहाने लायक भी नहीं बचा है.अब सवाल उठना लाजमी है कि प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘नमामि गंगे’ पर खर्च हुए अरबो ने अपना कारनामा क्यों नही दिखाया. नमामि गंगे प्रोजेक्ट की धनराशि गंगा सफाई पर खर्च हुआ है या भ्रस्ट्राचार की भेट चढ़ गया.




पंजाब केसरी के मुताबिक केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि हरिद्वार में गंगा नदी का पानी तकरीबन हर पैमाने पर असुरक्षित है. जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड में गंगोत्री से लेकर हरिद्वार जिले तक 11 लोकेशन्स से पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपल लिए गए थे. ये 11 लोकेशन्स 294 किलोमीटर के इलाके में फैली हैं. बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक आरएम भारद्वाज के अनुसार इतने लंबे दायरे में गंगा के पानी की गुणवत्ता जांच के 4 प्रमुख सूचक रहे, जिनमें तापमान, पानी में घुली ऑक्सिजन(DO), बायलॉजिकल ऑक्सिजन डिमांड(BOD) और कॉलिफॉर्म(बैक्टीरिया) शामिल हैं.हरिद्वार के पास के इलाकों के गंगा के पानी में BOD, कॉलिफॉर्म और अन्य जहरीले तत्व पाए गए.




केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के मुताबिक, नहाने के एक लीटर पानी में BOD का स्तर 3 मिलीग्राम से कम होना चाहिए, जबकि यहां के पानी में यह स्तर 6.4mg से ज्यादा पाया गया. इसके अलावा, हर की पौड़ी के प्रमुख घाटों समेत कई जगहों के पानी में कॉलिफॉर्म भी काफी ज्यादा पाया गया. प्रति 100ml पानी में कॉलिफॉर्म की मात्रा जहां 90 MPN(मोस्ट प्रॉबेबल नंबर) होना चाहिए, वह 1,600 MPN तक पाई गई. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक नहाने के पानी में इसकी मात्रा प्रति 100 ml में 500 MPN या इससे कम होनी चाहिए. इतना ही नहीं, हरिद्वार के पानी में DO का स्तर भी 4 से 10.6 mg तक पाया गया, जबकि स्वीकार्य स्तर 5 mg का है। जानेमाने पर्यावरणविद् अनिल जोशी ने कहा, ‘हरिद्वार इंडस्ट्रियल और टूरिस्ट हब बन गया है, ऐसे में जब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट इन्स्टॉल नहीं किए जाते और पानी की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी नहीं रखी जाती, घाटों का पानी प्रदूषित रहेगा. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, हरिद्वार के 20 घाटों में रोजाना 50,000 से 1 लाख श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं.एेसे में क्या इतने लाेगाें का गंगा में स्नान करना सही है?

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