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योगी भेष में छिपा भूमाफिया गुंडा ठाकुर सत्‍य नारायण सिंह उर्फ़ योगी सत्यम ,गंगा की गोद को किया कब्ज़ा

देश के  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट " नमामि गंगे " को भारत सरकार ने करोडो रुपये जारी कर गंगा की सफाई का बीड़ा दिया है ,केन्द्रीय मंत्री उमा भारती लगातार उक्त परियोजना पर तथस्थ रहकर निगरानी कर रही है वही तीर्थ नगरी इलाहाबाद में योगी के वेष में छिपा एक   भूमाफिया  गुंडा ठाकुर सत्‍य नारायण सिंह उर्फ योगी सत्‍यम सरकारी जमीनों से लगायत गंगा के बाढ़ क्षेत्र में अतिक्रमण करके अवैध निर्माण करा लिया और सरकारी एजेंसियां देखती रह गईं. योगी सत्‍यम सारे नियम-कानूनों को ताक पर रखकर अवैध कब्‍जा और निर्माण कराता रहा, जनता चिल्‍लाती रही, अधिकारी कागजी घोड़े दौड़ाने में व्‍यस्‍त रहे, सरकारी बाबुओं के कागजी घोड़ों को योगी सत्‍यम ने हवा में उड़ा दिया. योगी सत्‍यम के खिलाफ आवाजें उठतीं रहीं, लेकिन उनके अवैध कब्‍जे और अवैध निर्माण की रफ्तार नहीं रूकी. जो जैसे माना योगी सत्‍यम उसे वैसे मनाते रहे, साम, दाम, दंड, भेद का खूब प्रयोग किया .

सरकारों में योगी सत्‍यम ने नेताओं से लेकर अधिकारियों से अपने संबंधों का पूरा फायदा उठाया. दशकों के बाद भी योगी सत्‍यम के अवैध कब्‍जा और अवैध निर्माण से जमीनों को मुक्‍त नहीं कराया जा सका है. पिछली सरकार में जब सिस्‍टम के लोग ही जमीन कब्‍जाने में जुटे थे तो किसी का कब्‍जा हटवाने की बात सोचना ही गुनाह था. अब जब मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के नेतृत्‍व में भाजपा की सरकार बनी है तो लोगों में एक उम्‍मीद जगी है. योगी आदित्‍यनाथ ने एंटी भूमाफिया टास्‍क फोर्स गठित कर इस उम्‍मीद को परवाज भी दी है. अब देखना है कि एक ईमनादार योगी एक बेईमान योगी के कब्‍जे से सरकारी जमीनों और गंगा को मुक्‍त करा पाता है या फिर पुरानी कहानी ही दोहराई जाती है  या  यह गुंडा योगी अपने मंसूबो को परवान चढ़ाता रहेगा .

लखनऊ : अपने देश में कहा जाता है कि अगर किसी धंधे को सफल बनाना हो तो उसमें थोड़ा सा धर्म और थोड़ी सी राष्‍ट्रवाद मिला दें, यकीनन धंधा चमक उठेगा. तमाम उदाहरण भरे पड़े हैं. भूखे गरीब को रोटी देने में लोगों को तकलीफ होती है, लेकिन धर्म के नाम पर मालपुआ खिलाने से भी लोग परहेज नहीं करते हैं. धर्म के आगे कोर्ट-कचहरी से लेकर पुलिस-प्रशासन तक नतमस्‍तक हैं. इसका एक ताजा उदाहरण हैं, इलाहाबाद के झूंसी में स्थित क्रिया योग संस्‍थान. इस संस्‍थान के नाम पर सत्‍य नारायण सिंह ऊर्फ योगी सत्‍यम ने करोड़ों की सरकारी भूमि पर अवैध कब्‍जा जमा रखा है. फर्जी तरीके से सरकारी जमीन बैनामा करा लिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेनला करते हुए गंगा के बाढ़े क्षेत्र यानी पेटे में अवैध निर्माण करा लिया है, लेकिन सारे सबूत इकट्ठे होने के बावजूद सरकार और उसकी व्‍यवस्‍था इस अवैध निर्माण को ढहाने में अक्षम है.



दरअसल, पूरी मशीनरी योगी सत्‍यम की मंशा के अनुसार ही काम करती दिखती है, जबकि तहसीलदार और एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट में योगी सत्‍यम पर फर्जी दस्‍तावेजों के आधार पर सरकारी जमीन पर कब्‍जा करने का आरोप लगाया है, लेकिन पुलिस-प्रशासन अब तक उक्‍त सरकारी जमीन खाली नहीं करा पाया है. आरोप तो यहां तक हैं कि योगी सत्‍यम ने हंसतीर्थ मंदिर की तमाम प्राचीन मूर्तियों को तोड़कर मंदिर की जमीन पर भी अवैध कब्‍जा कर लिया है, लेकिन धर्म के नाम पर बनी पहचान और पहुंच के चलते उत्‍तर प्रदेश का पूरा सिस्‍टम योगी सत्‍यम के खिलाफ कार्रवाई करने में हिचकता है, जबकि इस तथाकथित योगी ने लोक निर्माण विभाग की जमीन पर भी कब्‍जा जमा लिया है. सत्‍यम योगी पर स्‍टाम्‍प चोरी से लगायत मारपीट, धमकी देने समेत दो दर्जन से ज्‍यादा मामले चल रहे हैं, लेकिन उत्‍तर प्रदेश में सिस्‍टम के किसी भी विभाग की मजाल है, जो कोई योगी पर हाथ डाल सके या  कार्रवाई कर सके.

 

उत्‍तर प्रदेश की धार्मिक और शिक्षा नगरी इलाहाबाद के फुलपुर तहसील के थाना झूंसी अंतर्गत आने वाला गांव कोहना झूंसी. गंगा किनारे बसा बहुत ही खुबसूरत गांव, लेकिन इस गांव की खुबसूरती को नजर लग गई है. धर्म की नगरी में धर्म के नाम पर अधर्म को अंजाम दिया जा रहा है, लेकिन उसे रोकने वाला कोई नहीं है.जिस किसी ने भी इसे रोकने की कोशिश की उसे फर्जी मुकदमों का सामना करना पड़ गया. गांव के लोग तथाकथित योगी सत्‍यम के कारनामों से परेशान है. क्रिया योग सत्संग समिति और अनुसंधान संस्थान के नाम से योगी सत्‍यम ने ग्राम सभा, लोक निर्माण विभाग तथा गंगा के पेटा में कब्‍जा कर अवैध निर्माण करा लिया है. इस अवैध कब्‍जेदारी के खिलाफ गांव के ही शिवलाल समेत तमाल लोग कानूनी लड़ाई लड़ने से लेकर सीएम, मंत्री, अधिकारी तक का चक्‍कर काट चुके हैं, लेकिन इनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही.



दरअसल, योगी सत्‍यम ने जमीन पर अवैध कब्‍जेदारी की शुरुआत फर्जी कागजातों के आधार पर गांव सभा की जमीन का अपने नाम बैनामा कराने के साथ की थी. योगी सत्‍यम ने केदारनाथ, ब्रदी प्रसाद तथा गंगाधर से गांव की पांच विस्‍वा जमीन का बैनामा कराया और इस पर निमार्ण कार्य शुरू करा दिया. गांव वालों को जब इस बात की भनक लगी तो उन्‍होंने इस मामले की जांच कराने के लिए तहसील का चक्‍कर काटना शुरू कर दिया. जनदबाव बनता देख प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कराई. जांच के बाद तहसीलदार ने उपजिलाधिकारी को अपनी आख्‍या दी, 12 अगस्‍त 2002 को दी गई आख्‍या में तहसीलदार ने लिखा – ‘जनपद इलाहाबाद के तहसील फूलपुर में परगना झूंसी के ग्राम झूंसी कोहना के राजस्‍व अभिलेख 1378 फसली के खसरे को आधार मानते हुए भूखंड संख्‍या 12 के विषय में 1398-1403 फसली की खतौनी के विषय में जांच की गई तो उसमें भिन्‍नता मिली है तथा इस भिन्‍नता का कोई वैज्ञानिक आधार आर-6 आदि अभिलेखों में भी दृष्टिगत नहीं हुआ है. 1378 फसली के खसरे में भूखंड संख्‍या 12 का कुल क्षेत्रफल 17 बिस्‍वा दर्ज रहा है, जो आबादी के खाते में है, किंतु 1398-1403 फसली की खतौनी में खाता संख्‍या 39 अ पर अ‍नधिकृत रूप से पांच बिस्‍वा केदारनाथ, बद्री प्रसाद पुत्रगण कामता प्रसाद एवं गंगाधार पुत्र बुचुनी निवासी ग्राम झूंसी कोहना के नाम चढ़ा दिया गया है. बाद की खतौनी 1404-1409 फसली को देखने से स्‍पष्‍ट हुआ कि खाता संख्‍या 210 पर भूखंड संख्‍या 12 का 0.137 हेक्‍टेयर क्षेत्रफल आबदी श्रेणी 6 (2) के खाते में दर्ज है तथा शेष पांच बिस्‍वा खाता संख्‍या 34 पर उक्‍त फर्जी खातेदारों के नाम चढ़ा दिा गया है. कालांतर में यही पांच बिस्‍वा भूखंड उक्‍त खातेदारों ने किय्रायोग सत्‍संग समिति संस्‍थापक योगी सत्‍यम के हाथों बेच दिया, जिसका खतौनी में नाम हो गया.’



तहसीलदार की इस रिपोर्ट के बाद उपजिलाधिकारी ने केदारनाथ, ब्रदीनाथ, कामता प्रसाद, गंगाधर एवं योगी सत्‍यम को 19 अगस्‍त 2002 को सम्‍मन भेजकर 26 अगस्‍त 2002 को न्‍यायालय में उपस्थित होने तथा उक्‍त प्रकरण पर अपना साक्ष्‍य पेश करने का निर्देश दिया. इसके बाद यह लोग उपस्थित तो हुए लेकिन कोई साक्ष्‍य प्रस्‍तुत नहीं कर पाए. बाद में भी कई अवसरों पर इन लोगों के वकीलों ने केवल समय बढ़ाने की मांग करते रहे. उपजिलाधिकारी न्‍यायालय ने निष्‍कर्ष निकाला कि जिस कर्मचारी या लेखपाल ने उक्‍त फर्जी प्रविष्टि क्षुद्र स्‍वा‍र्थों के वशीभूत होकर किया है, वह क्षमा का पात्र नहीं है. तहसीलदार फुलपुर उक्‍त कर्मचारी की यथाशीघ्र पहचान करके अपनी आख्‍या भेजें, जिससे उसे कठोरतम दंड दिया जा सके. उक्‍त पांच बिस्‍वा पूर्ववत आबादी के खाते में ही होना चाहिए. इसके बाद न्‍यायालय ने आदेश दिया कि ग्राम झूंसी कोहना के खाता संख्‍या 34 जो 1404-1409 फसली की खतौनी में है, में क्रमांक चार पर अंकित गाटा संख्‍या 12 का क्षेत्रफल 0.057 हेक्‍टेयर है, पर से अंकित फर्जी खातेदारों का नाम निरस्‍त किया जाता है और उक्‍त भूखंड आबादी श्रेणी 6 (2) के खाते में अंकित की जाए. तदानुसार संशोधनार्थ परवाना अमलदरामद जाती है. खतौनी शुद्ध प्रतिलिपि के साथ पत्रावली दाखिल दफ्तर की जाए. दिनांक 13 सितंबर 2002।

योगी सत्‍यम की हनक देखिए कि इस आदेश के बाद भी उन्‍होंने आबादी की जमीन से अपना कब्‍जा नहीं छोड़ा बल्कि इस पर अवैध निर्माण करा लिया. जिस किसी ने भी उनके इस काम का विरोध करने का दुस्‍साहस किया, उसके खिलाफ फर्जी मामले पुलिस की मिलीभगत से दर्ज करा दिए गए. योगी सत्‍यम और उनके लोग बंदूकों के बल पर सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण को अंजाम देते रहे, प्रशासनिक मशीनरी आंख बंद करके बैठी रही. एसडीएम न्‍यायालय के आदेश के बाद डेढ़ दशक बीच चुके हैं, आज तक प्रशासनिक मशीनरी उक्‍त जमीन को योगी सत्‍यम के कब्‍जे से मुक्‍त नहीं करा सकी है. योगी सत्‍यम की क्रिया योग संस्‍थान किसी जमीन पर पहले टीन के एडवेस्‍टस लगाकर घेरेबंदी करता है, इसके बाद इसकी आड़ में पक्‍के निर्माण को अंजाम दे दिया जाता है.

धीरे-धीरे करते हुए योगी सत्‍यम ने सरकारी जमीन के बड़े भूभाग पर कब्‍जा करके अवैध निर्माण करा लिया है. इस योगी के गैरकानूनी अतिक्रमण के खिलाफ सारा सिस्‍टम पंगु है. किसी गरीब द्वारा एक फीट सरकारी जमीन पर कब्‍जा करने पर पूरा सिस्‍टम, क्‍या पुलिस, क्‍या प्रशासन, सब मिलकर उसे बरबाद करने पर तुल जाते हैं, लेकिन योगी सत्‍यम के रसूख के सामने यह पूरा सिस्‍टम फेल है, नतमस्‍तक है. अब यह देखना भी दिलचस्‍प होगा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव को बुला लाने वाला योगी सत्‍यम भाजपा शासनकाल में कौन से गुल खिलाता है.बड़ा सवाल यह है कि ईमानदारी का ढिढोरा पीटने वाले मुख्यमंत्री योगी  आदित्‍यनाथ के कार्यकाल में इस गुंडे भूमाफिया   योगी सत्‍यम पर प्रशासन कोई कड़ाई करेगा या फिर वही ढांक के तीन पात हो जाता है.

लोक निर्माण विभाग की जमीन पर कब्‍जा

प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है कि पहले ग्राम सभा की जमीन पर कब्‍जा जमाने वाले योगी सत्‍यम और उनका क्रियायोग संस्‍थान धीरे-धीरे गंगा की पेटे और पीडब्‍ल्‍यूडी की जमीन पर भी काबिज हो गया. 5 मई 2011 को निर्माण खंड ब्रिज एंड रोड लो‍क निर्माण विभाग इलाहाबाद के अधिशासी अभियंता अशोक महतो ने उपजिलाधिकारी फूलपुर को पत्र लिखकर बताया कि क्रियायोग संस्‍थान ने लोक निर्माण विभाग की जमीन पर अतिक्रमण किया है. श्री महतो ने पत्र में लिखा कि खसरा खतौनी से स्‍पष्‍ट है कि गाटा संख्‍या 31 व 32 पर क्रियायोग संस्‍थान द्वारा अतिक्रमण किया गया है. गाटा संख्‍या 31 रकबा .297 हेक्‍टेयर तथा गाटा संख्‍या 32 रकबा 0.028 हेक्‍टेयर भारतीय राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राइज़ के नाम से राजस्‍व अभिलेखों में दर्ज है. इस पर निर्माण खंड ब्रिज एंड रोड लोनिवि इलाहाबाद का स्‍वामित्‍व है. जाहिर है कि योगी सत्‍यम ने ना केवल आबादी की जमीन बल्कि लोक निर्माण विभाग की जमीन पर भी अतिक्रमण कर रखा है.

गंगा के भीतर अवैध निर्माण

योगी सत्‍यम तथा उनके क्रियायोग संस्‍थान ने बेखौफ होकर गंगाजी के पेटे यानी की उनके बेड एरिया में भी अवैध कब्‍जा कर पक्‍का निर्माण करा लिया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि गंगा नदी के बाढ़ क्षेत्र में कोई पक्‍का निर्माण नहीं कराया जा सकता है. शिकायतकर्ता शिवलाल बताते हैं, ‘योगी सत्‍यम ने अपने बंदूकधारी सहयोगियों के बल पर गंगा के भीतर तक कब्‍जा कर लिया है. योगी सत्‍यम पक्‍का निर्माण कराने के लिए पहले टीन वाले एसवेस्‍टस से घेरवाते हैं, उसके बाद धीरे-धीरे उसके अंदर पक्‍का निर्माण करा लेते हैं.’ शिवलाल की बातों से इसलिए भी इनकार नहीं किया जा सकता कि इलाहाबाद विकास प्राधिकरण ने भी क्रियायोग में हुए अवैध निर्माण के ध्‍व‍स्‍तीकरण का आदेश दे चुका है, लेकिन आज तक शासन-प्रशासन की हिम्‍मत नहीं हुई कि वह अवैध कब्‍जा हटवा सके.

एडीए के जोनल अधिकारी अपने आदेश में लिखते हैं, ‘क्षेत्रीय अवर अभियंता/सहायक अभियंता(भवन) द्वारा अपने दैनिक प्रतिवेदन दिनांक 05.06.2008 को यह रिपोर्ट प्रस्‍तुत किया गया कि श्री योगी सत्‍यम द्वारा आराजी संख्‍या 37 एवं 38 स्थित स्थित मौजा झूंसी कोहना, इलाहाबाद द्वारा भूतल पर लगभग 70X150 फीट के क्षेत्रफल में 7 फीट बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जा रहा है. उक्‍त रिपोर्ट के आधार पर विपक्षी को उत्‍तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 27 एवं 28 के अंतर्गत कारण बतलाने एवं अवैध निमा्रण कार्य रोकने की नोटिस दिनांक 12.06.08 की सुनवाई तिथि नियत करते हुए दिनांक 06.06.08 को जारी की गई, जिसे डाक चपरासी द्वारा विपक्षी पर तामील कराया गया, लेकिन विपक्षी नियत तिथि पर उपस्थित नहीं हुआ। विपक्षी को मौका देते हुए दिनांक 12.06.08 को पत्र जारी किया गया, जिसकी सुनवाई तिथि 19.06.08 नियत की गई, लेकिन उक्‍त नियत तिथि पर भी पक्ष उपस्थित नहीं हुआ.

अवर अभियंता/सहायक अभियंता की आख्‍या दिनांक 12.09.2008 के क्रम में उक्‍त निर्माण को दिनांक 16.09.2008 को सील कर दिया गया, लेकिन विपक्षी द्वारा उक्‍त सील को तोड़ दिया गया, जिसके कारण 19.09.2008 को थानाध्‍यक्ष झूंसी इलाहाबाद को पत्र जारी किया गया साथ ही विपक्षी को शमन मानचित्र दाखिल करने हेतु दिनांक 24.09.2008 को पत्र जारी किया गया, लेकिन विपक्षी द्वारा शमन मानचित्र दाखिल नहीं किया गया। पुन: अवर अभियंता/सहायक अभियंता से दिनांक 04.08.2010 को निरीक्षण कराया गया. निरीक्षण आख्‍या के अनुसार ग्राम झूंसी कोहना थाना झूंसी तहसील फुलपुर जिला इलाहाबाद उत्‍तर प्रदेश में गंगा नदी के तट के 200 मीटर के अंतर्गत व बाढ़ क्षेत्र व संगम मेला क्षेत्र के भूखंड संख्‍या 1, 8, 37/1, 38, 39, 40 व 43 पर हुए बाउंड्रीवाल के पक्‍के निर्माण के अतिरिक्‍त सत्‍यम क्रिया योग समिति के खुला भाग के पीछे टीन शेड है.

दरअसल, यह बानगी है कि किस तरीके से शासन-प्रशासन के सभी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए योगी सत्‍यम ने आबादी व सरकारी जमीन के साथ गंगाजी की पेटी में भी अवैध निर्माण करा लिया. एडीए अपने आदेश में आगे लिखता है, ‘क्रिया योग संस्‍थान एवं क्रिया योग अनुसंधान संस्‍था में दो ब्‍लॉक बने हैं. भूतल, प्रथम तल, द्वितीय तल, तृतीय तल दोनों ब्‍लाकों में बने हैं तथा क्रिया योग अतिथि आश्रम में भूतल, प्रथम तल, द्वितीय तल बना है. मापे नहीं लेने दिया गया है. यहां यह भी उल्‍लेख करना है कि यह सभी निर्माण गंगा नदी तट से सटे हुए हैं.भू-उपयोग कुम्‍भ मेला क्षेत्र होने के कारण तथा गंगा नदी तट पर बाढ़ नगरों के किनारे 200 मीटर तक कोई भी निर्माण अनुमन्‍य नहीं है. इस प्रकार विपक्षी द्वारा किए गए अनाधिकृत निर्माण से उत्‍तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की धारा 14 व 15 का घोर उल्‍लंघन होता है, जिसको ध्‍वस्‍त करने के अलावा कोई विकल्‍प नहीं है. एडीए के ध्‍वस्‍तीकरण के आदेश के बावजूद आजतक क्रिया योग आश्रम की एक ईंट तक नहीं उखाड़ी जा सकी है. जब योगी सत्‍यम ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों तक को चुनौती देते हुए गंगा के पेटे में कंक्रीट का अवैध निर्माण करा डाला है.

हंसतीर्थ मंदिर पर कब्‍जा

योगी सत्‍यम ने हिंदू धर्म के प्राचीन मंदिर, जो तीर्थ प्रयाग में एक पवित्र स्‍थल माना जाता है, की जमीन पर भी अतिक्रमण कर लिया है. शरीर विज्ञान एवं वास्‍तुकला के आधार पर बने इस प्राचीन मंदिर की प्रकृति को ही बदल डाला गया है. स्‍थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि योगी सत्‍यम के क्रिया योग आश्रम ने मंदिर में लगी प्राचीन कीमती मूर्तियों को ध्‍वस्‍त कर दिया या फिर अपने संपर्कों के बल पर विदेश में ले जाकर बेच दिया है. खैर, यह जांच का विषय हो सकता है, लेकिन मंदिर की दशा देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्रिया योग संस्‍थान ने किस तरीके से इसके ऐतिहासिक स्‍वरूप से छेड़छाड़ किया है. योग क्रिया द्वारा कब्‍जा किए गए भूखंड संख्‍या 32, 33 एवं 34 से होकर ईदगाह और हंसतीर्थ का परंपरागत प्राचीन मार्ग जाता था. इसी से लोग कुंभ मेला क्षेत्र, गंगाजी, ईदगाह, हंसतीर्थ तथा धार्मिक तीर्थ सन्‍ध्‍यावट की तरफ जाते थे. योगी सत्‍यम ने इस पूरे भूखंड पर अवैध निर्माण कराकर इन रास्‍तों को बंद कर दिया है. इस भूखंड संख्‍या पर पांच सितारा होटलनुमा अवैध इमारत का निर्माण करा दिया है.

हाईकोर्ट ने निर्माण पर लगाई रोक

योगी सत्‍यम के क्रिया योग संस्‍थान के अवैध निर्माण के खिलाफ वकील सुनील चौधरी ने एक जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्रिया योग संस्थान द्वारा गंगा के किनारे कराए जा रहे निर्माण पर रोक लगा दी थी.कोर्ट ने क्रिया योग सत्संग समिति और अनुसंधान संस्थान के अध्यक्ष योगी सत्यम और सचिव राधा सत्यम को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया.कोर्ट ने इलाहाबाद जिलाधिकारी को भी निर्देश दिया है कि वह याची द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच स्थलीय निरीक्षण करके करें तथा अपनी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें. तत्‍कालीन मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ सुनवाई की थी.याचिका में कहा गया है कि योगी सत्यम ने वर्ष 2002 में झूंसी में एक छोटा प्लाट खरीदा था.इसी प्‍लाट की आड़ में उसने आसपास की कई एकड़ भूमि अवैध रूप से कब्जा जमा लिया. कब्जा की गई जमीन सरकारी हैं, जिसमें नवीन परती, ऊसर, नाला, बंजर, आबादी आदि की जमीनें हैं. इनकी कीमत50 करोड़ रुपये से अधिक है.

याचिकाकर्ता ने बताया कि 19 जून 2013 को उपजिलाधिकारी फूलपुर ने योगी सत्यम द्वारा कब्जा की जमीनों की जांच कर अपनी रिपोर्ट दी है, मगर उस रिपोर्ट पर प्रशासन ने आज तक कोई कार्रवाई नहीं की इलाहाबाद विकास प्राधिकरण और प्रशासन के अधिकारियों की जानकारी में पूरा मामला है, इसके बावजूद अवैध कब्जा रोकने या इसे ढहाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया, बल्कि कागजी खानापूर्ति करके अपना पल्‍ला झाड़ लिया गया.सुनील चौधरी ने कोर्ट को यह भी बताया है कि एडीए के मास्टर प्लान में गंगा के किनारे 200 मीटर तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं कराया जा सकता। हाईकोर्ट ने भी अधिकतम बाढ़ बिंदु से 500 मीटर तक किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाई है. इसके बावजूद क्रिया योग संस्थान और योगी सत्‍यम द्वारा दो सौमीटर के प्रतिबंधित गंगा क्षेत्र में अवैध रूप से भूमि कब्जा कर पक्‍का निर्माण कराया जा रहा है.

एडीए ने एक बार क्रिया योग के निर्माण को सील कर दिया था, बावजूद इसके योगी सत्‍यम ने सील तोड़कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया.वर्ष 2011 में 21 जून के अपने आदेश में मंडलायुक्‍त इलाहाबाद ने क्रिया योग संस्‍थान का प्रत्‍यावेदन यह कहते हुए निरस्‍त कर दिया था कि जिस स्‍थान पर संस्‍थान निर्माण करा रहा है वह गंगा के 200 मीटर प्रतिबंधित क्षेत्र में है. इस स्‍थान पर माघ मेला का आयोजन होता है, इसके चलते भी यहां किसी भी प्रकार के निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती. कोर्ट के आदेश के बावजूद अब तक मामला अधर में ही लटका पड़ा है.

योगी सत्‍यम पर दर्जनों मामले

देखे योगी का आपराधिक इतिहास गेरुआ वस्त्र में छिपा हिन्दू धर्म का गुंडा ठाकुर सत्यनारायण सिंह उर्फ़ योगी सत्यम,राज्यपाल राम नाइक का संरक्षण ?

 

रिपोर्ट  :  अनिल सिंह (बरिष्ठ पत्रकार एवं प्रहार लाइव के संपादक है )

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