You are here

राष्ट्रीय विकास मोर्चा ने जद (यू) से किया गठबन्धन,17 दिसम्बर को नीतीश का लखनऊ में सम्मान

राष्ट्रीय विकास मोर्चा के घटक दलों में प्रगतिशील मानव समाज पार्टी , राष्ट्रीय समानता दल, राष्ट्रीय क्रान्ति पार्टी, जनवादी पार्टी (सोसलिस्ट) तथा जयहिन्द समाज पार्टी शामिल 

लखनऊ .उत्तर प्रदेश के अलग –अलग हिस्सों में अपनी राजनैतिक जमीन तलाश रही पार्टियों के संयुक्त मंच राष्ट्रीय विकास मोर्चा ने आज  जनता दल (यू) के साथ यूपी में राजनीतिक गठबन्धन की घोषणा की तो  एक अन्य दल भारतीय सामाजिक न्याय मोर्चा ने जद (यू) में विलय का ऐलान किया. जनता दल यू कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में गठबन्धन व विलय करने वाले दलों के नेताओ ने कहा की जाति –पाति-धर्म से परे होकर नीतीश कुमार ने बिहार को बिकास माडल के रूप में देश के पटल पर प्रतिस्थापित  किया है ,उनकी सरकार में जातिगत आधार पर सभी अतिपिछड़ों को उचित प्रतिनिधित्व मिला है.जिसके लिए अति पिछड़ों के संगठन अति पिछड़ा चेतना मंच 17 दिसंबर को लखनऊ में एक सम्मेलन कर बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार को सम्मानित करेगा .

प्रेस वार्ता में के सी त्यागी ने कहा कि यूपी में सपा-बसपा से लेकर भाजपा तक की सरकारें रही हैं लेकिन अतिपिछड़ों में से कुछ को छोड़ किसी को भी इन पार्टियों ने उनका वाजिब हक नहीं दिया . बिहार में नितीश सरकार ने अतिपिछड़ों को उनका सारा हक दिया है. उसी से प्रेरित होकर अति पिछड़ा चेतना मंच  ने नितीश कुमार  को सम्मानित करने का फैसला किया.

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी एवं राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि दोनों मोर्चे के पदाधिकारी एक दिन पूर्व यूपी में अस्तित्व में आए गठबन्धन के शीर्ष नेताओं रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह एवं बीएस-4 सुप्रीमो आरके चौधरी से भी मिल चुके हैं. उन्होंने कहा कि वंचित लोगों की नुमाइन्दगी करने वाले कई और दल हमारे गठबन्धन में शामिल होने की तैयारी में हैं. दोनों नेताओं ने कहा कि बिहार में नितीश कुमार के नेतृत्व में बने महागठबन्धन जैसा प्रयोग किए बिना यूपी में भाजपा को रोक पाना मुश्किल है.उन्होंने बताया की आज राष्ट्रीय विकास मोर्चा के घटक दलों में प्रगतिशील मानव समाज पार्टी , राष्ट्रीय समानता दल, राष्ट्रीय क्रान्ति पार्टी, जनवादी पार्टी (सोसलिस्ट) तथा जयहिन्द समाज पार्टी शामिल है.

श्री त्यागी ने कहा कि हमारा लक्ष्य यूपी में भाजपा को सत्ता से दूर रखना है. इससे सपा-बसपा का कोई लेना-देना नहीं है.

 

इसे भी पढ़े -