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मनुवादी मीडिया का फर्जी सर्वे : नमो का जलवा कायम, चुनाव हुए तो फिर मोदी सरकार

कुल 11373 मतदाताओ से बातचीत के आधार पर तय हो गया देश कि सत्ता का भाग्य
देश के अलग अलग राज्यों में सरकार के प्रति दलितों ,पिछडो में आक्रोश
भाजपा शासित राज्यों में अपराध का बोलबाला

नई दिल्ली. 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की सरकार केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई, इस समय जहां केंद्र सरकार केवल 3 साल में अब तक किए गए काम का प्रचार -प्रसार करने में लगी है, वहीं विपक्ष केंद्र सरकार की नाकामियों को उजागर करने का दावा कर रहा है. इस बीच एक सर्वे के मुताबिक अगर आज चुनाव हुए तो मोदी सरकार फिर से सत्ता में आ सकती है.

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एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति के सर्वे के मुताबिक अगर आज चुनाव हुए तो एनडीए को 331 सीटें मिल सकती हैं ,जबकि यूपीए को 104 सीटों का अनुमान लगाया गया है .अन्य के खाते में 108 सीटें आ सकती हैं . एनडीए के वोट शेयर में 7 फीसदी का इजाफा हो सकता है.

एबीपी न्यूज-सीएसडीएस-लोकनीति की सर्वे के मुताबिक बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और पूर्वोत्तर के राज्यों में एनडीए को 2014 से भी ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है। इन राज्यों में लोकसभा की कुल 142 सीटें हैं। सर्वे में एनडीए को 71 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है, सर्बे के अनुसार यूपीए को सिर्फ 25 सीटें मिल सकती हैं,सर्वे के मुताबिक पूर्वी भारत में एनडीए के वोट शेयर में करीब 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाई जा रही है .

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सर्वे के मुताबिक पूर्वी भारत में भले ही एनडीए को फायदे मिलने का अनुमान है लेकिन बिहार और झारखंड में उसे कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है। सर्वे के मुताबिक भ्रष्टाचार के आरोपों से लालू यादव को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचेगा। ओडिशा, बंगाल और असम में एनडीए को फायदा हो सकता है।

सर्वे के मुताबिक यूपी, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब जैसे उत्तर भारत के राज्यों में कुल मिलाकर एनडीए को कुछ सीटों का नुकसान हो सकता है। उत्तर भारत की कुल 151 सीटों में एनडीए को 116 सीटें मिल सकती हैं जो 2014 के मुकाबले 15 कम है। यूपीए को 15 सीटें मिल सकती हैं जो पहले से 9 ज्यादा है। सर्वे में अन्य के खाते में 20 सीटों का अनुमान किया गया है जो 2014 के मुकाबले 6 ज्यादा है। सर्वे के मुताबिक हरियाणा और पंजाब में एनडीए को नुकसान हो सकता है। सर्वे के मुताबिक उत्तर भारत में एनडीए को 50 प्रतिशत वोट मिल सकते हैं जबकि यूपीए को 18 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है।

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गुजरात, एमपी, जैसे पश्चिम-मध्य भारत के राज्यों में एनडीए को मामूली घाटा हो सकता है। पश्चिम-मध्य भारत में कुल 118 सीटें हैं जहां एनडीए को 105 सीटें मिलने का अनुमान है जबकि 2014 में उसे यहां 109 सीटें मिली थीं। इस तरह एनडीए को 4 सीटों का घाटा हो सकता है। इस क्षेत्र में यूपीए को 12 सीटें मिल सकती हैं जो 2014 के मुकाबले 3 ज्यादा है। अन्य के खाते में भी 1 सीट आ सकती है। 2014 में यहां अन्य के खाते में एक भी सीट नहीं गई थी। पश्चिम मध्य भारत में एनडीए का वोट शेयर बढ़ सकता है। सर्वे में इस क्षेत्र में एनडीए को 56 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है जो 2014 के मुकाबले 3 प्रतिशत ज्यादा है।

सर्वे के मुताबिक दक्षिण भारत की कुल 132 सीटों में एनडीए को 39 सीटें मिल सकती हैं जो 2014 के मुकाबले सिर्फ एक कम है। एनडीए को आंध्र प्रदेश और केरल में फायदा हो सकता है। दक्षिण भारत में यूपीए को जबरदस्त फायदा मिल सकता है। यहां उसे 52 सीटें मिल सकती हैं जो 2014 के मुकाबले 29 ज्यादा है।

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एबीपी न्यूज के मुताबिक सर्वे 1 मई से 15 मई के बीच किया गया। इसके लिए 19 राज्यों की 146 विधानसभा सीटों की 584 पोलिंग के 11373 लोगों से बातचीत की गई है।

सर्वे को यदि आधार मान लिया जाय तो सर्वे के मुताबिक PM नरेन्द्र मोदी का जलबा बरकार दिखाया गया है ,PM मोदी के गृह राज्य गुजरात के एक स्थानीय चुनाव में भाजपा का सुफडा साफ़ हो गया ,मीडिया में इस खबर कि चर्चा भी नहीं उठी ,पश्चिम बंगाल के स्थानीय चुनाव में भाजपा अपने सहयोगी सहित धराशाई हो गई ,शुसासन का नारा देकर उत्तर प्रदेश कि सत्ता पर काबिज भाजपा कि सरकार में अपराध और अपराधियों का बोलबाला है ,अपराध खुल कर योगी सरकार को चुनौती दे रहा है .सहारनपुर के दंगे ने सरकार कि खूब फजीहत करवाया ,इस दंगे के बाद से ही दलितों ,पिछडो में भाजपा के प्रति असंतोष व्याप्त है .

प्रधानमंत्री के गृह राज्य गुजरात में पाटीदार आन्दोलन के दौरान जिस प्रकार से सरकार के इसारे पर पटेलो को मारा गया ,फर्जी मुकदमे लगाकर जेल के शिकंजो के भीतर किया गया ,सरकार के दमनात्मक रवैये के बाद से ही गुजरात का पटेल समाज चुनाव में भाजपा को गुजरात और देश कि सत्ता से बेदखल करने का मंसूबा पाल कर भाजपा सरकार का विरोध कर रहा है .

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फिरहाल भीम आर्मी ने सहारनपुर के मामले को आन्दोलन का रूप दे दिया है ,भीम आर्मी के समर्थन में देश भर में दलित ,पिछड़े व अल्पसंख्यक समाज के लोग सडको पर उतर चुके है ,दिल्ली के जंतर मंतर पर भीम आर्मी के समर्थन में उतरा जनसैलाब को बिदेशी मीडिया को to दिख गया किन्तु देश कि मनुवादी मीडिया आँख बंद कर मीडिया के द्वारा दलित समाज के इस आन्दोलन को दबाने का प्रयाश किया.

देश में अलग अलग प्रान्तों में सरकार के प्रति जनसामान्य में आक्रोश भरा है ,ऐसे में इस सर्वे कि सार्थकता कितनी सही होगी वकत बताएगा .

श्रोत-बिभिन्न मीडिया रिपोर्ट

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