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मानवीय सम्बेदना कुंद कर बैठा सरकारी अस्पताल का प्रशासन

कानपुर. कानपुर में पुलिस के एक दारोगा को अपनी 86 साल की बीमार मां का इलाज कराने के लिए सोमवार को जिला हॉस्पिटल पहुंचा.उसकी मां के चल-फिर न पाने के कारण उक्त दरोगा ने वार्ड बॉय से स्ट्रेचर की मांग की किन्तु वार्ड बॉय और हॉस्पिटल प्रशासन करीब एक घंटे तक एक स्ट्रेचर के लिए उसको इधर-उधर घुमाता रहा. स्ट्रेचर ने मिल पाने के कारण उक्त दरोगा को मजबूरन मां को गोद में उठाकर इलाज के लिए वार्ड तक ले जाना पड़ा.
घटना कानपुर के उर्सला जिला हॉस्पिटल का है,जहा सोमवार को दारोगा राजेश कुमार दीक्षित अपनी बीमार मां सोनकली का इलाज कराने के लिए पंहुचा .यहां डॉक्टर ने उन्हें सीनियर फिजिशियन के पास भेजा.इसके लिए उन्होंने वार्ड बॉय से स्ट्रेचर मांगा, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं कराई गई.मजबूरन दारोगा को खुद गोद में उठाकर वार्ड तक इलाज के लिए ले जाना पड़ा.इस दौरान मां को गोदी में लिए उसे सीढ़ियों से ऊपर नीचे भी चढ़ना उतरना भी पड़ा .
दारोगा राजेश कुमार दीक्षित के अनुसार मां की अचानक तबियत बिगड़ गई थी. इलाज के लिए अपने बेटे के साथ यहां आए थे. लेकिन स्ट्रेचर की व्यवस्था नहीं कराई गई.मैंने नर्स-वार्ड बॉय से मिन्नतें भी की, लेकिन कोई मदद नहीं मिली.वार्डबॉय और अस्पताल प्रशासन एक घंटे तक इधर-उधर घुमाता रहा.मजबूरन खुद मां को गोदी में उठाकर इलाज के लिए वार्ड तक ले जाना पड़ा. तब जाकर इलाज हो सका.पीड़ित का कहना है कि जब एक सरकारी कर्मी को भी सुविधा न मिले तब क्या फायदा.
उत्तर प्रदेश के तमाम जिलो की तस्वीरे यही है सरकार के लाख दावे के बाद भी अस्पताल प्रसाशन और कर्मचारी सरकारी सौबिधाओ के उपलब्ध होने के बाद भी अपनी मानवीय सम्बेदना परे कुंद मारे बैठे है ,जब खादी वर्दी के दरोगा को अस्पताल प्रसाशन ने इस कदर घुमाया तो आम गरीब का इन अस्पतालों में क्या हाल होता होगा सोचनीय है.

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