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वाह प्रभाकर साहब ………

लखनऊ |नौजवान दिखने में मासूम साधारण लिबास। एकदम स्टूडेंट टाइप अंदाज में एक युवक पीठ पर बैग लटकाए  साधारण बस एव ऑटो रिक्शा से यात्रा कर दोपहर करीब ढाई बजे कानपुर देहात पुलिस कप्तान  के बंगले में दाखिल होता है। पुलिस कप्तान के स्टेनों के बारे में पूछने पर दरबान  सिपाही हाथ से संबंधित कमरे की तरफ जाने का इशारा कर देता है। उक्त कमरे में दाखिल होकर उक्त यूवक ने  स्टेनो से कहा ..जरा एसपी का सीयूजी नंबर दीजिए। यह सुनते ही  स्टेनो के माथे पर सिलवटें पड़ गईं और बोले आप कौन होते हो सीयूजी सिम लेने वाले। इस पर युवक ने हंसकर कहा-मैं प्रभाकर चौधरी। इतना सुनते ही स्टेनो के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं और झट से हाथ ऊपर कर सैल्यूट मारते हुए कहा..ससससररररर… सॉरी सर। हमें अंदाजा न था कि आप इतने सादे अंदाज में चले आएंगे चार्ज लेने। हम तो सोचे थे कि आपके आने की सूचना पर हम गाड़ी भेजकर  रिसीव करेंगे। आपने तो सर सरप्राइज कर दिया।

 

इस पर उक्त नौजवान आईपीएस अफसर ने कहा-हमारा यही अंदाज है। बात हो रही 2010 बैच के आईपीएस प्रभाकर चौधरी की। शासन ने हाल में कुछ आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर किए तो प्रभाकर चौधरी को बलिया से कानपुर देहात का एसपी बनाकर भेजा गया। उन्होंने कानपुर देहात एसपी का पद संभालने के अपने अनोखे अंदाज से सबको चौंका दिया।

बताया जाता है की प्रभाकर चौधरी अपने काम के दौरान किसी का भी हस्तक्षेप नहीं मानते और अपने तरीके से अलग अंदाज में अपने कार्य को बखूबी अंजाम देते है उनके कार्यस्थल वाले जिले में दलाली ,फरेबी थानेदारो की  दाल नहीं गलती और वो थाने के कार्यभार से मुक्त हो जाते है | प्रभाकर चौधरी के बारे में लोगो का कहना है की प्रभाकर चौधरी के समय में अपराध ,अपराधी और बिभागीय भ्रस्टाचारी या तो सुधर जाते है या सलाखों के भीतर पहुच  जाते है|

 

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