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अंसारी परिवार को चुनौती देंगे मास्टर साहब

गाजीपुर .विधानसभा चुनाव में 2017 का परिणाम काफी रोचक आने वाला है, और हो भी क्यों ना इस बार के चुनाव में अब तक काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है. कइयों ने अपने पाले बदले तो कइयों के पाले बदलने के बाद भाग्य भी खुल गए. यही नहीं, इस कारण राजनीतिक पार्टियों को अपने ही समर्थकों की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है. इसी कड़ी में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा पर मुकाबला भी आप को हैरान कर देने वाला दिखाई देने वाला है. जहां एक तरफ बाहुबली परिवार की दावेदारी है, वहीं एक इंटर कॉलेज के मास्टर भी मैदान में अपनी ताल ठोकने को तैयार हो चुके है. तो आज जानिए क्यों है सूबे की इस विधानसभा सीट पर सबकी निगाह और क्यों खास है अंसारी परिवार के लिए ये सीट. खास बात यह है कि इस सीट पर अब एक मास्टर साहब को कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित किया है.




गाजीपुर .विधानसभा चुनाव में 2017 का परिणाम काफी रोचक आने वाला है, और हो भी क्यों ना इस बार के चुनाव में अब तक काफी उतार चढ़ाव देखने को मिला है. कइयों ने अपने पाले बदले तो कइयों के पाले बदलने के बाद भाग्य भी खुल गए. यही नहीं, इस कारण राजनीतिक पार्टियों को अपने ही समर्थकों की नाराजगी भी झेलनी पड़ रही है. इसी कड़ी में गाजीपुर के मोहम्मदाबाद विधानसभा पर मुकाबला भी आप को हैरान कर देने वाला दिखाई देने वाला है. जहां एक तरफ बाहुबली परिवार की दावेदारी है, वहीं एक इंटर कॉलेज के मास्टर भी मैदान में अपनी ताल ठोकने को तैयार हो चुके है. तो आज जानिए क्यों है सूबे की इस विधानसभा सीट पर सबकी निगाह और क्यों खास है अंसारी परिवार के लिए ये सीट. खास बात यह है कि इस सीट पर अब एक मास्टर साहब को कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित किया है.
क्या खास है गाजीपुर की मोहम्मदाबाद विधानसभा सीट में
गाजीपुर जिले की मोहम्मदाबाद सीट मुख्तार अंसारी के परिवार के लिए साख की बात है. इस सीट पर मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी विधायक हैं. ये बात अलग है कि जब बृजेश सिंह के बीजेपी नेता कृष्णानंद राय के चुनाव अभियान का समर्थन किए जाने के बाद राय ने 2002 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मोहम्मदाबाद से मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को हराया था, पर समय बदलता गया और हालात बदलते गए, फिर 2009 में मायावती ने अंसारी परिवार को न सिर्फ मसीहा बताया, बल्कि मुख्तार अंसारी को लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया. कुछ ही समय के बाद बसपा से भी रिश्तों में खटास आ गई और तीनों भाईयों ने मिलकर 2010 में कौमी एकता दल पार्टी का गठन किया और चुनाव भी जीते. अब जब सपा में विलय में नहीं हो पाया और ये अब बसपा के साथ हैं और अब बसपा का दामन पकड़ कर अन्सारी परिवार मऊ और गाजीपुर जिले के साथ पूर्वांचल पर अपना धाक जमाना चाहता है. इस पर सपा ने तो अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा किया, हां ये सीट कांग्रेस की झोली में जरूर डाल दी.
कौन हैं अंसारी को टक्कर देने वाले मास्टर साहब
मोहम्मदाबाद सीट पर सपा और कांग्रेस के गठबंधन के उम्मीदवार जनक कुशवाहा हैं, जो इस सीट पर कांग्रेस के सिम्बल पर चुनाव लड़ेंगे। जनक कुशवाहा बरेसर क्षेत्र के बरेजी गांव के रहने वाले हैं जो जहूराबाद विधानसभा क्षेत्र में आता है. सन 1991 में इन्होंने कांग्रेस के जरिये राजनीति शुरू की.1994 में जिला युवक कांग्रेस के महासचिव बने. उसके बाद वर्ष 2000 तक मोहम्मदाबाद ब्लॉक कांग्रेस के उपाध्यक्ष रहे. वर्ष 2005 में कांग्रेस किसान मजदूर के उपाध्यक्ष बने. उसी बीच वह जिला पंचायत की बाराचवर तृतीय सीट से सदस्य का चुनाव लड़े, लेकिन लाख मशक्कत के बाद भी हार गए. पार्टी के मोहम्मदाबाद नगर अध्यक्ष की भी जिम्मेदारी संभाले. उसके बाद पार्टी संगठन में उनका कद बढ़ता गया. वह वर्ष 2015 तक राजीव गांधी पंचायत राज संगठन की पूर्वांचत इकाई के संयोजक बने. उसके बाद संगठन के बिहार के प्रभारी बनाए गए. इसी क्रम में इन्होंने अपने इलाके में सोनिया गांधी डिग्री कॉलेज की स्थापना की. कई बार पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़, असम, बिहार में युवक कांग्रेस के संगठन के चुनाव अधिकारी का भी काम देखे. जनक कुशवाहा पेशे से वह शिक्षक हैं और संप्रति ज्योति इंटर कॉलेज, महाराजगंज में कार्यरत है और अब कांग्रेस ने इन्हें नई जिम्मेदारी दी है, जो अन्सारी परिवार के खिलाफ मुहम्दाबाद विधानसभा से चुनावी मैदाव में अपनी दावेदारी पेश करेंगे.
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अनुज कुमार मौर्या वनइंडिया

 

 

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