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अखिलेश यादव की राह का काँटा बनेंगे मुलायम के लोग ,इटावा से हो गयी शुरुवात

अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी पर कब्जा तो जमा लिया है, लेकिन अपने ही घर में उनके खिलाफ घेराबंदी भी शुरू कर दी गई है. इसकी शुरुआत शिवपाल यादव ने इटावा में ‘मुलायम के लोग’ नाम से ऑफिस को खोलकर कर दी है.
मुलायम के गढ़ इटावा में समाजवादी पार्टी दो खेमों में बंटी हुई है. एक तरफ अखिलेशवादी सोच है तो दूसरी ओर मुलायमवादी सोच. मुलायम के पैतृक जिले में सहानुभूति की लहर शिवपाल और नेताजी के साथ साफ़ नजर आ रही है.
सपा में जसवंतनगर सीट से प्रत्याशी के तौर पर सीमित हो चुके शिवपाल ने अखिलेश नेतृत्व को जवाब देने के लिए इटावा में समाजवादी दफ्तर से अलग एक सामानांतर ऑफिस का उद्घाटन किया है. इस ऑफिस का नाम है ‘मुलायम के लोग’. दरअसल इस दफ्तर को शिवपाल का वॉर रूम कहा जा रहा है जो कि ठीक समाजवादी पार्टी के स्थानीय ऑफिस के बगल में है.

इस ऑफिस की नींव उसी दिन पड़ गई थी जिस दिन निर्वाचन आयोग ने समाजवादी पार्टी और उसके सिंबल का फैसला अखिलेश यादव के हक में सुनाया था. हालांकि इसका विधिवत उद्घाटन रविवार को शिवपाल यादव ने किया. इस दौरान शिवपाल ने कहा मुलायमवादी लोग इस ऑफिस से काम करेंगे और इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि नेताजी के सिद्धांत दूर-दूर तक पहुंच सके.
‘मुलायम के लोग’ ऑफिस इटावा के सिविल लाइन्स में स्थित है, जहां समाजवादी पार्टी का भी दफ्तर है. इस दफ्तर की कमान भी सुनील यादव को दी गई है जिन्हें समाजवादी पार्टी में सत्ता हस्तांतरण के बाद हटा दिया गया था. सुनील के साथ सदर से तीन बार के विधायक रघुराज सिंह शाक्य और 200 अन्य कार्यकर्ता इस ऑफिस की बागडोर संभाल रहे हैं.
शहर के बड़े रियल एस्टेट बिज़नसमैन संजय शुक्ला ने शिवपाल समर्थकों के लिए इस ऑफिस को मुहैया कराया है. संजय शुक्ला शिवपाल यादव के करीबियों में से एक हैं.
वैसे तो इस ऑफिस का उद्देश्य सपा के संरक्षक मुलायम सिंह के सिद्धांतों को प्रचार और प्रसार करना है, लेकिन वास्तव में यह शिवपाल का वार रूम है, जहां से वे आगामी चुनावों में मुलायम के गढ़ इटावा और इसके आस-पास के जिलों में अपनी चुनावी रणनीति बनाएंगे.
बता दें शिवपाल पहले ही कह चुके हैं कि यह चुनाव सत्ता के लिए नहीं बल्कि उनके लिए धर्मयुद्ध है.
शिवपाल के समर्थकों ने खुले तौर पर कह दिया है कि वे शहर की दो सीटों- सदर और भरताना से पार्टी को समर्थन नहीं करेंगे. गौरतलब है कि इन दोनों सीटों से मौजूदा विधायक रघुराज शाक्य और सुखदेवी वर्मा को समाजवादी पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दिया है.
शिवपाल के इस वार रूम में उनके समर्थक फिलहाल इस रणनीति में जुटे हुए हैं कि कैसे जसवंतनगर सीट से उनकी बड़ी जीत को सुनिश्चित किया जाए. शिवपाल यादव इस सीट से चौथी बार मैदान में हैं. पिछली बार 2012 में उन्होंने यह सीट 81 हजार के मार्जिन से जीती थी. इस बार वे लोगों से जीत का अंतर ज्यादा करने की अपील कर रहे हैं ताकि वे पार्टी के नए आला कमान को मैसेज दे सकें.

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