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दागी मुखिया तो कैसे खिलेगा उत्तर प्रदेश में कमल

लखनऊ .उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मिया तेजी से राजनैतिक तापमान को को अपनी गिरफ्त में ले चुकी है .केंद्र की सत्ताशीन भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार स्पष्ट बहुमत के साथ बनाने का दावा कर रही है . भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वरा लगातार  उत्तर प्रदेश की बर्तमान सत्ताधारी समाजवादी पार्टी पर अपराध और अपराधियों को संरक्षण देने वाली सरकार और मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव पर हमला बोला जा रहा है किन्तु उत्तर प्रदेश को अपराध एवं भ्रस्टाचार मुक्त बनाने का नारा देकर चुनावी समर में सत्ता प्राप्ति की योजना पर काम कर रही भाजपा ने कई दागियो को पार्टी में शामिल कर खुद को दागदार बनाकर उत्तर प्रदेश में साफ़ सुथरी राजनीति का खोखला दावा कर रही है.

जिस भाजपा का झंडा कभी श्यामा प्रसाद मुखर्जी व अटल बिहारी बाजपेयी जैसे शीर्ष नेता बुलंद करते थे, तब भाजपा का कमान ऐसे हाथों में थी जहां अपराधियों से अधिक जनता के बीच लोकप्रिय नेताओं पार्टी के पदों पर  तरहीज दी जाती थी लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुद भाजपा में अपराधियों को भर्ती कर रहे हैं.जिसका जीता जागता उदाहरण प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या है, जिनके ऊपर दर्जनों आपराधिक मुकदमे होने के बाद भी उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वरा सौप दिया गया है.आज उन्ही केशव के सहारे उत्तर प्रदेश में अपराध मुक्त सरकार का नारा दिया जा रहा है .

अपराधिक इतिहास

आईपीसी की धाराएं                                                                                                                   अन्य विवरण

143, 188, 283, 341                                                                   जमीन पर कब्जा करने की गरज से खेतों में आग लगाने  से                                                                                                                       सम्बन्धित एक मामला

302, 120 बी                                                                                हत्या और हत्या की साजिश रचने से सम्बन्धित एक-एक मामला

153, 188                                                                                      किसी धर्म विशेष के खिलाफ उत्तेजक भाषण और जमीन कब्जाने                                                                                                           की गरज से खेतों में आग लगाने से सम्बन्धित एक-एक प्रभार,                                                                                                                 चुनाव के दौरान शस्त्र जमा न करने

147, 148, 153, 153, 352, 188,                                                  गाली-गलौज, मार-पीट, शारीरिक चोट पहुंचाने और जमीन पर                                                                                                                  कब्जा जमाने

323, 504, 506, 147, 295, 153                                                भड़काऊ भाषण और विवादित बयान से सम्बन्धित मामले

420, 467, 465, 171, 188                                                         धोखाधड़ी और चुनाव के दौरान शस्त्र जमा न करने सम्बन्धी मामला

147, 352, 323, 504, 506, 392                                                मार-पीट, गाली-गलौज और लूटपाट से सम्बन्धित मामला

153, 353, 186, 504, 147, 332                                                 मार-पीट, पुलिस से दुर्व्यवहार समेत अन्य अपराधिक मामलों से                                                                                                              सम्बन्धित

147, 323, 504, 427, 353, 506, 380                                      चोरी और मार-पीट समेत अन्य अपराधिक मामले

147, 148, 332, 336, 186, 427                                                 व्यक्तिगत अथवा दूसरों की जान को खतरे में डालने और चोरी समेत                                                                                                        अन्य मामले

143, 353, 341                                                                            जमीन पर कब्जा जमाने की गरत से सार्वजनिक मार्ग के अवरोध से                                                                                                           सम्बन्धित

भाजपा सांसद केशव प्रसाद के खिलाफ दर्ज यह मामले तो महज बानगी भर हैं जबकि जानकार सूत्रों का मानना है कि सिराथू विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधायक रहते हुए इन्होंने कई गंभीर अपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया. राजनीति में अच्छी पकड़ और दबंगई के बूते दर्जनों की संख्या में मामले दर्ज ही नहीं हो सके.

पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की कर्मस्थली ‘फूलपुर’ पिछले लगभग तीन दशकों से अपराधिक प्रवृत्ति के सांसदों की गिरफ्त में है.जातीय समीकरण इस संसदीय क्षेत्र के विकास में रोड़ा बने हुए हैं तो दूसरी ओर अपराधिक चरित्र के नेताओं ने भी इसकी तस्वीर बदरंग कर रखी है. जाति और धर्म के आधार हिंसा की वारदातें यहां आम हो चुकी हैं. इस संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम, यादव, ब्राह्मण एवं कुर्मियों की संख्या अधिक है. कभी इस इलाके में समाजवादी पार्टी के टिकट पर सांसद रह चुके माफिया अतीक अहमद का आतंक हुआ करता था. तीन दर्जन से भी ज्यादा अपराधिक मामलों में वांछित अतीक पर कानून का शिकंजा कसा तो सपा के धर्मराज सिंह पटेल की तूती बोलने लगी. लोकसभा चुनाव 2014 में नरेन्द्र मोदी की लहर ने पूरे भारत पर अपना असर दिखाया तो फूलपुर संसदीय क्षेत्र भी उससे अछूता नहीं रह सका, परिणामस्वरूप इसका लाभ भाजपा के टिकट पर सिराथू से विधायक रहे बाहुबली नेता केशव प्रसाद मौर्या को भी मिला. श्री मौर्या पहली बार इस संसदीय क्षेत्र से सांसद बन गए हैं. श्री मौर्या का अपराधिक कृत्य भी इलाके में खासा चर्चित है. जानकार सूत्रों की मानें तो इलाके में उनकी हनक है. बाहुबली भाजपा सांसद केशव पर हत्या, हत्या की साजिश रचने सहित दर्जन भर अपराधिक मामले पंजीकृत हैं. पुलिस इनके खिलाफ बकायदा चार्जशीट तक लगा चुकी है. इलाकाई लोगों का मानना है कि यदि मौर्या के सिर पर भाजपाई दिग्गजों का हाथ नहीं होता तो ये निश्चित तौर पर संसद में नहीं बल्कि सलाखों के पीछे होते. कुछ लोगों का तो यहां तक मानना है कि यदि पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद पर कानून का शिकंजा न होता तो श्री मौर्या का लोकसभा चुनाव जीतना तो दूर की बात खुलेआम सड़कों पर चुनाव के दौरान प्रचार करना भी खतरनाक साबित हो सकता था. बताया जाता है कि जिस मोहम्मद गौस की हत्या मामले में श्री मौर्या को नामजद किया गया था वह अतीक गैंग से सम्बन्ध रखता था. इस लिहाज से अतीक से इनका छत्तीस का आंकड़ा है. इससे पूर्व इस संसदीय क्षेत्र से बाहुबली नेता रामपूजन पटेल (तीन बार), जंग बहादुर पटेल (दो बार) सपा के टिकट पर सांसद रह चुके हैं. 2009 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर पंडित कपिल मुनि करवरिया ने चुनाव जीता था.

यह दीगर बात है कि नरेन्द्र मोदी ने चुनाव प्रचार के दौरान अपराधिक छवि के नेताओं से दूरी बनाने के तमाम वायदे करते है . सच्चाई यह है कि  16वीं लोकसभा के गठन की तस्वीर जब सामने आयी तो मोदी के दावे हवा में दिखे.543 लोकसभा सांसदों में से 112 सांसद ऐसे हैं जिन पर हत्या, हत्या के प्रयास, सांप्रदायिक हिंसा, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोप हैं. पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के जरिए नवनिर्वाचित सांसदों पर किए गए अध्ययन के मुताबिक ये आंकड़ा 34 फीसदी है. चौंकाने वाला पहलू यह है कि माफियाओं से दूरी बनाने का दंभ भरने वाली मोदी की सेना में अपराधिक छवि के सांसदों की संख्या सर्वाधिक है. संस्था ने ये आंकड़ा नामांकन के समय दाखिल किए गए हलफनामें के आधार पर तैयार किया था.

फिरहाल  भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव के कुकर्मो को बिपक्षी पार्टी जनता के बीच प्रसारित कर भाजपा के कथनी और करनी में फर्क को बताने में पीछे नहीं है.इस संदर्भ में भाजपा अध्यक्ष का पक्ष जानने का प्रयाश किया गया किन्तु बात न हो सकी .

 

 



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