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सपा ने पिछली सीट पर कांग्रेस , अब क्या होगा ’27 साल-यूपी बेहाल’ नारे का

नयी  दिल्ली . समाजवादी पार्टी-कांग्रेस के गठबंधन का औपचारिक एलान रविवार को हो चुका है. सपा के प्रदेश अध्‍यक्ष नरेश उत्तम ने गंठबंध का एलान करते हुए कहा कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ कांग्रेस के साथ मिलकर हम चुनाव लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस 105 सीटों पर लड़ेगी जबकि सपा 298 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी. नरेश उत्तम ने कहा कि हम कांग्रेस उम्मीउवारों को जिताने का काम करेंगे. गंठबंधन के एलान के दौरान कांग्रेस नेता राज बब्बर ने कहा कि हम मिलकर चुनाव लडेंगे और  सांप्रदायिक ताकतों को हराने का काम करेंगे.


जानकारों की माने तो इस गंठबंधन के एलान के बाद ‘27 साल, यूपी बेहाल के नारे के साथ’ उत्तरप्रदेश में चुनावी मुहिम का आगाज करने वाली कांग्रेस को साइकिल पर सवार होकर जीत की चाहत महंगी पड सकती है. सपा के साथ गठबंधन के मूर्त रुप लेने के बाद भी यह सवाल महत्वपूर्ण है कि क्या कार्यकर्ताओं में पहले जैसा जोश होगा और जनता क्या उसे लेकर खास गर्मजोशी दिखायेगी और जिन सीटों पर पार्टी नेताओं को टिकट नहीं मिला, उनका रुख क्या होगा ?

 

गंठबंधन के एलान के पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस नेता प्रदीप जैन आदित्य ने कहा कि हम चाहते हैं कि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में महागठबंधन बने लेकिन जो स्थितियां बनी… उससे निश्चित तौर पर अजीब स्थिति बन गई थी. इसको लेकर लोगों के अंदर झुंझलाहट है, परेशानी का भाव था. हालांकि गठबंधन पर जब बात होती है तब इस तरह की स्थितियां आती हैं. ‘ उन्होंने कहा कि सपा ने जिस तरह से हमारे वर्तमान विधायकों की सीट पर अपने उम्मीदवार घोषित कर दिये हैं, उसको लेकर क्षोभ उत्पन्न हुआ था ‘‘ कांग्रेस ने हालांकि पहले से ही 403 सीटों पर पूरी तैयार कर रखी थी. राहुलजी ने महीने भर पूरे प्रदेश का दौरा किया था और सभी वर्ग के लोगों से मुलाकात की थी. कांग्रेस की तैयारी तो पूरी है, हम केवल यह देख रहे थे कि जिस तरह से मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गठबंधन की बात की, उस पर अमल होता है तो धर्मनिरपेक्ष ताकतों को और मजबूती मिलेगी.’ समाजवादी पार्टी ने अपनी पहली सूची में ऐसी कई सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं जहां से कांग्रेस जीत की उम्मीद कर सकती थी.

क्या होगा 27 साल, यूपी बेहाल नारे का…

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव की तरह चौंकाने वाला सियासी दांव खेलकर कांग्रेस को एक तरह से सकेत में डाल दिया था. दूसरी ओर कांग्रेस जरुरी सियासी एहतियात नहीं बरत पायी. कांग्रेस ने पहले सभी सीटों पर तैयारी कर रखी थी. सबने कि राहुल गांधी ने पूरे प्रदेश का दौरा किया और लोगों से मिले. लोगों में कांग्रेस के बारे में काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया रही थी. कांग्रेस ने ‘27 साल, यूपी बेहाल के नारे के साथ’ उत्तरप्रदेश में चुनावी मुहिम का आगाज किया था. राहुल गांधी एक महीने तक गांव-गांव घूमे और किसानों से कर्ज माफी का वायदा किया. इसके बाद इन विषयों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भी सौंपा था. उनकी यात्रा ने कई ऐसे स्थानीय नेताओं का ध्यान खींचा जिन्हें दूसरी पार्टियों में अहमियत नहीं मिल पा रही थी. विश्लेषकों की माने तो सुस्त पडे हुए कांग्रेसी कार्यकर्ता हरकत में आने लगे थे. जैसे ही लगने लगा कि कांग्रेस पार्टी में कुछ जान फूंकी जा सकती है, वैसे ही पार्टी के भीतर अखिलेश यादव के साथ गठबंधन की बात उछाली जाने लगी.

क्या गंठबंधन का फायदा होगा दोनों पार्टियों को ?

जानकारों की माने तो कई कांग्रेस नेताओं ने गठबंधन को लेकर घटनाक्रम को दबाव बनाने की राजनीति मान रहे हैं और उन्हें लगता है कि सपा और कांग्रेस के गठबंधन से दोनों दलों को फायदा होगा. यही कारण है कि प्रदेश में दोनों पार्टियों ने गंठबंधन किया है और साथ में चुनाव लड़ने का फैसला किया है. अब यह गंठबंधन कितना बल प्रदान करेगा यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा.

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SABHAR-PRABHAT KHABAR

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