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स्वामी चक्रपाणि हिंदू महासभा का सदस्य तक नहीं

लखनऊ .बसपा को बतौर अखिल भारतीय हिंदू महासभा का रास्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि महाराज ने कल समर्थन देने की घोषणा किया था ,बसपा को समर्थन देने की घोषणा के बाद एक नए बिवाद ने जन्म ले लिया है .अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने बहुजन समाज पार्टी को समर्थन देने से इनकार किया है. महासभा का कहना है कि खुद को महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बता कर बसपा को समर्थन देने वाले स्वामी चक्रपाणि सभा के सदस्य तक नहीं हैं. पार्टी ने चक्रपाणि के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का मन बना लिया है.
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के कार्यकारी अध्यक्ष पंडित बाबा नंद किशोर मिश्र ने कहा कि हिंदू महासभा उत्तर प्रदेश में किसी भी पार्टी को समर्थन नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि बसपा को समर्थन की घोषणा करने वाले स्वामी चक्रपाणि के खिलाफ पार्टी के नाम के दुरुपयोग के आरोप में कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा कि चक्रपाणि हिंदू महासभा के प्रारंभिक सदस्य नहीं हैं. यह दिल्ली उच्च न्यायालय भी मान चुका है.उन्होंने कहा “उच्च न्यायालय नई दिल्ली 16 मार्च, 2016 को अपने दिए निर्णय में स्वामी चक्रपाणि को हिंदू महासभा का प्रारम्भिक सदस्य भी मानने से इनकार कर चुका है. इस निर्णय के खिलाफ स्वामी चक्रपाणि की अपील को सर्वोच्च न्यायालय भी 10 मई, 2013 को खारिज कर चुका है. बावजूद इसके स्वामी चक्रपाणि अपने आपको हिंदू महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बता कर बसपा को गुरुवार को समर्थन की घोषणा कर न सिर्फ पार्टी के नाम का दुरूपयोग किया है बल्कि न्यायालय के निर्णय की खुलेआम अवहेलना की है.
उन्होंने कहा दिनेश चंद्र त्यागी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. स्वामी चक्रपाणि द्वारा अपने को राष्ट्रीय अध्यक्ष बताते हुए हिंदू महासभा के नाम से बसपा का समर्थन करना पार्टी को बदनाम करने की कोशिश की है, जिस पर पार्टी चक्रपाणि के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी.



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