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पाटीदारों की भारी संख्या के आगे , अमित शाह का जातिवाद हाबी ,रुपानी होगे पुनः CM

नई दिल्ली.गुजरात के विधानसभा चुनाव में पाटीदार अनामत आन्दोलन का खूब असर रहा ,पाटीदार नेता हार्दिक पटेल का कांग्रेस के पक्ष में प्रचार अभियान की कमान सँभालते ही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व पेशोपेश में पड़ हार्दिक फैक्टर पर लगाम लगाने की रणनीति पर काम करना प्रारंभ कर दिया ,चुनाव के दौरान भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने पाटीदारो पर दाव खेलते हुए इस बात की हवा को भी बल दिया था कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो पटेल समुदाय केहाथ ही मुख्यमंत्री का ताज होगा .

गुजरात चुनाव के परिणाम आते ही सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल होना शुरू हुआ कि गुजरात में 88 पाटीदार विधायक विधानसभा पहुंचे हैं. इनमें 48 विधायक भाजपा से और 40 विधायक कांग्रेस पार्टी से हैं.इस मैसेज के साथ ये उम्मीद भी जताई जाने लगी कि भाजपा के चुनाव चिन्ह पर जीत कर विधानसभा पहुचे 49.5 प्रतिशत विधायक पटेल समाज से है इस दशा में भाजपा 48 पाटीदार विधायकों की वजह से मजबूरी में किसी पटेल के हाथ ही गुजरात की सत्ता सौपेगी .

इस उम्मीद का दूसरा कारण पाटीदार अनामत आन्दोलन के नेता हार्दिक पटेल की बढ़ती ताकत और 2019 के चुनावों में फिर से एक बार पटेलों को समर्थन लेने की मजबूरी माना जा रहा था लेकिन जीतने के बाद भाजपा ने फिर से अध्यक्ष अमित शाह की पसंद और स्वजातीय विजय रुपानी के सर पर विधायक दल के नेता का ताज पहनाते हुए पार्टी आलाकमान ने तमाम दावों को दरकिनार करते हुए घोषित कर दिया कि विजय रुपानी ही गुजरात के मुख्यमंत्री जबकि नितिन पटेल राज्य के उप-मुख्यमंत्री रहेंगे.कहने को फैसला भाजपा की विधायक दल की बैठक में लिया गया, लेकिन इस लोकतांत्रिक ढ़ाचे का सच ये भी है कि रूपाणी का नाम आलाकमान ने तय करके विधायकों पर थोप दिया है.

गुजरात विधानसभा में भाजपा के 50 प्रतिशत पटेल विधायको की मौजूदगी के बावजूद अमित शाह के स्वजातीय विजय रुपानी का मुख्यमंत्री बनाया जाना हार्दिक पटेल के मुद्दे में अब आग में घी का काम कर गया ,पटेलों की हिस्सेदारी और स्वाभिमान की पृष्ठभूमि में बड़ा हुआ हार्दिक पटेल का आन्दोलन अब और मजबूती पकड़ेगा . भाजपा के अंदरखाने अब चर्चा होने लगी है कि इस बार के चुनाव ने एन -केन – प्रकारेंण विजय श्री हासिल कर सरकार बना रही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने अपने स्वजातीय को पाटीदारों की भारी संख्या के आगे तरजीह दी है. ऐसे में हार्दिक इस मुद्दे को पाटीदारों के सम्मान से जोड़ने में सफल रहे तो 2019 में भाजपा के लिए लड़ाई आसान नहीं होगी.

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