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गौरक्षा के नाम पर फर्जी लोग पिट रहे जबकि हिन्दू समाज ही बड़े बूचड़खानो का मालिक

आज सबसे अधिक परेशान भारत का किसान और मजदूर है. केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण किसान जीवन और मृत्यु से संघर्श कर रहा है. मोदी सरकार ने वोट की राजनीति के लिए शिगूफा छोड़कर किसानों का मानसिक शोषण किया है -पल्लवी पटेल 

आज सबसे अधिक परेशान भारत का किसान और मजदूर है. किसान की अर्थव्यस्था से मजदूर भी जुड़ा है और देश की तरक्की भी. लेकिन केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण किसान जीवन और मृत्यु से संघर्ष कर रहा है. मोदी सरकार ने वोट की राजनीति के लिए शिगूफा छोड़कर किसानों का मानसिक शोषण किया है . स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर उपज के समर्थन मूल्य का डेढ़ गुना सरकार देगी और किसानों का ऋण माफ कर दिया साथ ही बिजली बिल साफ कर दिया जायेगा किन्तु भाजपा का यह वादा लफ्फाजी सावित् हुआ . उ0प्र0 की कर्ज माफी में भी बीजेपी सरकार ने किसानों को 3 श्रेणी में बांट दिया.पहला-बड़ा किसान, दूसरा-सीमान्त किसान, तीसरा लघु सीमान्त किसान. दो करोड़ 65 लाख किसानों में से सिर्फ 50 लाख लघु किसानों का ऋण माफ करना देश के किसानों के साथ अन्याय है.

उक्त बाते अपना दल के बहराइच किसान सम्मेलन में राश्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती पल्लवी पटेल ने व्यक्त करते हुए कहा कि आज सबसे अधिक परेशान भारत का किसान और मजदूर है. केन्द्र सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण किसान जीवन और मृत्यु से संघर्श कर रहा है. मोदी सरकार ने वोट की राजनीति के लिए शिगूफा छोड़कर किसानों का मानसिक शोषण किया है .

श्रीमती पटेल ने कहा कि गोरक्षा के नाम पर समाज के एक तबके के लोगों को वृहद स्तर पर परेशान किया गया है और आज मा0 उच्चतम न्यायालय ने भी सरकार को चेताने का काम किया है , जबकि भारत में सबसे बड़े बूचड़खाने के मालिक हिन्दू समाज से है. सरकार को अब उच्चतम न्यायालय के आदेशो का पालन करना चाहिए.केन्द्र की बीजेपी सरकार पिछड़ोें से आरक्षण छीनना चाहती है. संविधान के रास्ते से मण्डल कमीषन ने ओबीसी को 27 प्रतिषत का आरक्षण दिया है. 3700 मेडिकल सीटों में 27 प्रतिशत के हिसाब से 1000 सीटें ओबीसी को मिलनी चाहिए जबकि मात्र 86 सीटें ही मिली है. ओबीसी को इसके लिए संगठित होकर एक स्तर से केन्द्र सरकार की मुखालफत करनी चाहिए.

केन्द्र सरकार द्वारा नोटबंदी में आपातकाल को भी मात दे दी.इस नोटबंदी से अमीर घरानों को छोड़कर शेष भारत का पूरा समाज परेशानी भरा समय व्यतीय किया. लोग रोजगार से वंचित हो गये है. छोटे कारखाने बन्द हो जाने से मजदूर सड़क पर आ गया है. किसानों को समय से बीज, खाद नहीं मिल पाया, और नोटबंदी की वजह से जीडीपी घटकर 5.2 प्रतिषत के आस-पास हो गई. जिससे डेढ़ लाख करोड़ का भारी नुकसान इस नोटबंदी के गलत निर्णय से भारत को उठाना पड़ा। नोटबंदी अब तक का देष का सबसे बड़ा घोटाला है जिसमें टैक्स चोरी करने वाले उद्योगपतियों को मजबूत किया गया और जिसको केन्द्र की भाजपा सरकार में 1 लाख करोड़ रूपया माफ किया गया. क्या भारत के समस्त किसानों का ऋण नहीं माफ किया जा सकता है. केन्द्र में अपना दल की सरकार आयेगी तो भारत के सभी किसानों का कर्ज माफ किया जायेगा और उद्योगपतियों से वसूली की जायेगी.

रास्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रो0 गंगाराम यादव ने सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार को समान कार्य के लिए समान वेतन देने का कार्य करना चाहिए.शिक्षा मित्रों को बेगारी देने से बाज आना चाहिए. उनको भी अन्य प्रदेषों की तरह 10,000 रूपये के बजाए 25-30 हजार रूपये प्रतिमाह वेतन भत्ता देना चाहिए. इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्र ने काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को भी सरकारी कर्मचारी मानते हुए मूल वेतन मिलना चाहिए.

रास्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य एवं प्रवक्ता आर0बी0 सिंह पटेल ने कहा कि उ0प्र0 की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है. गोरखपुर की तरह फर्रूखाबाद में भी 49 बच्चों की दवाओं और आक्सीजन की कमी से मृत्यु हो गई है. यही हाल बहराइच के अस्पतालों का है, जो सरकार और उसका मंत्रालय बच्चों की हिफाजत नहीं कर सके तो उसे एक भी मिनट सत्ता में बैठने का अधिकार नहीं है. नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए.

श्री पटेल ने कहा कि जब तक देश का किसान खुसहाल नहीं होगा तब तक देश का विकास सम्भव नहीं है. केन्द्र सरकार ने किसानों से सम्बन्धित कृषि यन्त्रों, खाद, बीज और ट्रैक्टर पर जीएसटी लगाकर किसानों को उद्योगपतियों का गुलाम बनाना चाहती है और यही कारण है कि केन्द्र और प्रदेष सरकार की कृषि विरोधी नीति के कारण पूरे देश का किसान आन्दोलित है. किसानों पर गोलियां चलाकर उनके आन्दोलन को भाजपा सरकार द्वारा कुचलने का काम किया गया.कृषि आज घाटे का सौदा बन गई है जो कभी जीडीपी में 50 प्रतिषत का योगदान देने वाला किसान आज आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहा है. अगले चुनाव में बीजेपी को हटाकर अपना दल को ताकत दें.दल को बढ़ाने के लिए मिषन के रूप में काम करके गांव स्तर पर जाकर मजबूती प्रदान करना होगा. प्रत्येक बूथ में कमेटी गठन करना सुनिष्चित करना होगा. दल को गति देने के लिए 8 सितम्बर से किसान सम्मेलन विधानसभा स्तर पर लगाये गये है. प्रथम चरण में 16 जनपद लिए गये हैं.लगभग 30 विधानसभाओं का कार्यक्रम बना है. यह तैयारी आगामी आने वाले उपचुनाव और निकाय चुनाव में हमें ताकत प्रदान करेगी.

सम्मेलन कि अध्यक्षता नन्द किशोर पटेल ने किया ,मण्डल उपाध्यक्ष देवीपाटन विमल वर्मा समेत हजारो पार्टी कार्यकता उपस्थित रहे.

 

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