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उन्नाव: महाप्राण के निर्वाण दिवस पर आयोजित हुआ काव्य समारोह

निराला शिक्षा निधि द्वारा आयोजित हुआ समारोह

बीघापुर,उन्नाव। महाप्राण पं0 सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘‘निराला‘‘ के 56वें निर्वाण दिवस पर आयोजित अखिल भारतीय काव्य समारोह उनकी स्मृति में स्थापित महाप्राण निराला पी0जी0 कालेज ओसियाँ,बीघापुर में माँ वागेश्वरी व निराला जी की प्रतिमा पर दीप पुष्प अर्पित कर निराला शिक्षा निधि के संस्थापक कमला शंकर अवस्थी ‘‘दद्दू‘‘, प्रबंधक गौरव अवस्थी,प्राचार्य डाॅ0 सुरेन्द्र सिंह व डाॅ0 कुसुम लता द्विवेदी ने किया।

काव्य समारोह का शुभारम्भ हैदरगढ़ से पधारे शिव किशोर तिवारी ‘खंजन‘ की वाणी वंदना से हुआ- जब लै अइहौ न महतारी हम बोलावा करिबै। वहीं वर्तमान समय में गिर रहे नैतिक मूल्यों को अपने गीत के माध्यम ये पढ़ा- सिर्फ कहने को आजाद हम हो गए,खो गईं आज जीवन की आजादियाँ बद चलन कुछ विदेशी हवाएं चलीं, जिन में फंस कर के हम बर्बाद हो गए।पहले उठ कर सवेरे पिता मात के शीश चरणों में हम सब झुकाते रहे,आज माता पिता पा रहे यातना ऐसे बेदर्द जल्लाद हम हो गए।

इसके बाद साहित्य वाटिका के सम्पादक डाॅ0 मान सिंह ने सियासत पर प्रहार करती ग़ज़ल पढ़ी- हादसे दर हादसे इस मुल्क में होते रहे,और जिम्मेदार सारे मौन धर सोते रहे।कुछ के कुत्ते खा रहे हैं दूध के संग रोटियाँ, कुछ बच्चे यहाँ भूख से रोते रहे।वहीं काव्य मंच पर उन्नाव के वरिष्ठगीतकार शिव बालकराम ‘‘ सरोज‘‘ ने अपने गीत में महिला उत्पीड़न को पढ़ा- सजी हुई फूलों की डोली अपने घर को लाते हो, नारी क्या कोई होली है जिसको रोज जलाते हो।

इसके बाद लखमपुर खीरी से आईं रंजना सिंह हया ने श्रृंगार के सागर में कुछ ऐसे नहलाया- चैन पाले जिगर फिर चली जाऊँगी,देख ले इक नजर फिर चली जाऊँगी,माँ के आँगन से बचपन के दिन काटकर, सीख लूँ कुछ हुनर फिर चली जाऊँगी।इसके बाद हास्य और व्यंग्य के सशक्त हस्ताक्षर निराला की धरती से पधारे राधेश्याम भारती ने मंच को नई ऊँचाइयाँ दीं- उन्होंने वर्तमान राजनीति पर कुछ यूँ व्यंग्य पढ़ा-यह सच है गणेश जी कोई नशा नहीं करते, लेकिन नशे की लत उनके परिवार में है।जिसे सुन कर स्रोता सोचने पर मजबूर रहे।

इसके बाद रायबरेली से पधारे गीतकार सतीश कुमार सिंह ने पढ़ा- तेज हवाओं से कह दो अब पेड़ गिराने मत आना,बच्चे जिससे डर जाएं वह खेल दिखाने मत आना,जीवन भर की पूंजी है यह हरा भरा मेरा आँगन, तुमसे यही गुजारिश है दीवार उठाने मत आना।ओज के नए हस्ताक्षर विश्वनाथ ‘विश्व‘ ने पढ़ा- भारत में रह के जो पाक के हिमायती हों,ऐसे दुश्ट दानवों को ठोक देना चाहिए।

गीतकार बलदेव सिंह सागर ने पढ़ा- जिन्दगी है या बहाना है कहाँ किसका ठिकाना , सांस के रिश्ते पुराने कोई माने या न माने, प्राण की सौगात लेकर आ गई धड़कन जगाने, अपनी नजरों से गिरें तो तुम मुझे दर्पण दिखाना।जैसी शुद्ध कविता का वाचन किया।

अन्त में काव्य समारोह की अध्यक्षता कर रहे वासुदेव अवस्थी ने पढ़ा- भाग्य बचपन का फूटे नहीं, दिल किसी का भी टूटे नहीं,छूट जाए ये दुनिया भले, माँ किसी की भी छूटे नहीं।इसके अलावा कमलेश शुक्ल ‘कमल‘ , पूर्व प्राचार्या डाॅ0 अर्चना श्रीवास्तव ने भी काव्य पाठ किया।कार्यक्रम का कुशल संचालन अनिरुद्ध सौरभ ने किया और ओज पूर्ण काव्य पाठ किया।

समारोह के समापन पर प्रबंधक नीरज अवस्थी ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर सुनील अवस्थी, मनोज सिंह, डाॅ0 शशि रंजना अग्निहोत्री, डाॅ0 मीनाक्षी द्विवेदी, अनिल अवस्थी, बाबू सिंह एडवोकेट, जगदेव सिंह, देव शरण विश्वकर्मा, राम चन्द्र बाजपेयी, प्रमोद सिंह, आनंद मोहन द्विवेदी,बाबू गंगा प्रसाद यादव, देश राज सहित अन्य लोग रहे।

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