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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कानूनी नोटिस के बाद इंटरनेशनल आर्बिटरेशन में भारत पर केस

नई दिल्ली .व्यावसायीक समझौते के तहत बकाया की रकम न मिलने व भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नोटिस भेजे जाने के बाद भी उक्त मामले में हस्तक्षेप न करने के कारण कार बनाने वाली जापानी कंपनी निसान मोटर्स ने भारत के खिलाफ इंटरनेशनल आर्बिटरेशन में मामला दर्ज कराया है.

इसके तहत काट निर्माता कंपनी ने भारत पर स्‍टेट इन्‍सेंटिव के तौर पर करीब 5,000 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं करने की बात कही है. पिछले साल कंपनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कानूनी नोटिस भी भेजा था. इस नोटिस में तमिलनाडु सरकार से इन्‍सेंटिव के तौर पर बकाया पेमेंट की मांग की गई थी. कंपनी ने 2008 में तमिलनाडु सरकार के साथ समझौते के तहत राज्‍य में कार मैन्‍यूफैक्‍चरिंग प्‍लॉट लगाया था. निसान ने नोटिस में 2,900 करोड़ रुपए के अनपेड इन्सेंटिव और 2,100 करोड़ रुपए डेमेज, ब्याज आदि के रुप में मांगे हैं.

निसान द्वारा भेजे नोटिस में कहा गया था कि राज्‍य के अधिकारियों से 2015 में बकाए के भुगतान के लिए बार-बार अनुरोध किया गया लेकिन राज्‍य के अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया. यहां तक कि कंपनी के चेयरमैन कार्लोस घोस्‍न ने पिछले साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मदद मांगी लेकिन यह अनुरोध भी बेनतीजा रहा .जुलाई 2016 में निसान के वकीलों द्वारा भेजे गए नोटिस के बाद भारत सरकार, तमिलनाडु सरकार और निसान के अधिकारियों के बीच एक दर्जन से ज्यादा बार बैठक हुईं.

भारत सरकार के अधिकारियों ने निसान को भरोसा दिलाया था कि पेमेंट किया जाएगा और इसे कानूनी मामला नहीं बनाया जाना चाहिए, लेकिन अगस्‍त में निसान ने भारत सरकार को एक आर्बिटेटर नियु‍क्‍त करने की चेतावनी दी. पहली आर्बिटेशन सुनवाई दिसंबर के मध्‍य में होगी वहीं तमिलनाडु सरकार के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने कहा कि सरकार को उम्‍मीद थी कि इंटरनेशनल आर्बिटरेशन में जाए बिना विवाद का समाधान हो जाएगा. बकाया राशि को लेकर कोई दिक्‍कत नहीं थी और इस विवाद का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं किन्तु प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस मामले में चुप्पी साध रखा है .मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पीएम मोदी के ऑफिस से इस मसले पर कोई जवाब नहीं मिला.

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