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RSS की धरती से दलित छात्र धम्मवीर बौद्ध को उठवा लेने की धमकी,विश्वविद्यालय प्रशासन ABVP के तथाकथित गुंडे के साथ

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा (महाराष्ट्र) में एक दलित छात्र को अपमानित और उत्पीड़ित करने का मामला सामने आया है। दलित छात्र धम्मवीर बौद्ध को चंद्रभूषण सिंह ने कथित रूप से उनके वस्त्रों और विचारों को लेकर अपमानित किया ।

घटना विगत 23 अगस्त 2017 को रात 09:30 के करीब की हैं.धम्मवीर रात्रि भोजन कर बिरसा मुंडा छात्रावास से अपने होस्टल भगत सिंह में जा रहे थे तभी होस्टल के गेट पर ए.बी.वी.पी. छात्र संगठन के सदस्य चंद्रभूषण सिंह ने उनके चीवर (बौध भिक्षु का वस्त्र) को पकड़कर खींच लिया और कहा कि यह चोला-चोली क्या पहने हो, पहले अपनी आत्मा को साफ करो तथा गाली गलौज किया . भंते धम्मवीर इस घटना से बहुत अपमानित हुए और इसकी सूचना दूसरे भंते साथी को दी। दूसरे दिन रात के समय धम्मवीर और दो अन्य भंते के साथ आरोपी चंद्रभूषण सिंह के रूम पर इसका कारण पूछने गए। आरोपी उस समय शराब के नशे में धुत्त था और भंते को यह कहते हुए धमकी दी कि यह आरएसएस की धरती है और तुम्हें उठवा लूंगा।

दलितछात्र द्वारा पुलिस को दिया गया प्रार्थना पत्र
दलितछात्र द्वारा पुलिस को दिया गया प्रार्थना पत्र

यहाँ तमाम तरह भ्रम से बचने के लिए दो बातों पर ध्यान देने की जरूरत है। पहला यह कि वर्धा में शराब बेचना और पीना कानूनन अपराध है फिर होस्टल में अवैध रूप से शराब पी जा रही है। दूसरी बात यह कि आरोपी चंद्रभूषण सिंह एवं उनके साथियों के द्वारा विवाद को बिहारी बनाम मराठी का रंग देने की कोशिश कुछ वेब पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। तो जान ले की चंद्रभूषण सिंह बिहार से है और भंते धम्मवीर उत्तरप्रदेश से हैं । यहां पर बिहारी और मराठी की कोई लड़ाई नही ।

रात में विवाद बढ़ने पर वार्डेन लेखराज दन्नाना भी होस्टल में आये । उनके सामने भी आरोपी ने भंते को मारने पिटने की धमकी दी जिससे वहाँ मौजूद वार्डेन इस घटना को देख असहाय नजर आए । वार्डेन ने पीड़ित को आश्वासन दिया कि कल 10 बजे इस घटना की जांच करके कार्यवाई की जाएगी लेकिन दूसरे दिन विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा कुछ नही किया गया। प्रशासन द्वारा कुछ न किये जाने पर भंते अपने साथियों को लेकर रामनगर थाने में मुक़दमा दर्ज करवाने गए। थाने से पुलिस विश्वविद्यालय में आ गयी आरोपी से पूछताछ करने के उद्देश्य से परन्तु पुलिस ने विश्वविद्यालय कुलपति या प्रॉक्टर से विश्वविद्यालय में प्रवेश करने की अनुमति नही ली थी। पुलिस द्वारा अनुमति न लेने की घटना के कारण छात्रों ने पुलिस वैन को रोक लिया। ऐसी स्थिति में भंते को अपमानित करने वाली घटना को दबाने के लिए मुद्दे को छात्र बनाम पुलिस बनाने की कोशिश की गई।

आरोपी ने भी विश्वविद्यालय में शिकायत दर्ज कराई है कि भंते ने अपने 40 साथियों के साथ उन्हें बुरी तरह पीटा। ऐसी स्थिति में विश्वविद्यालय को आरोपी का मेडिकल चेकअप करवाया जाना चाहिये था जो कि नही हुआ । इससे यह साफ जाहिर होता है कि विश्वविद्यालय इस मामले में लीपापोती करना चाहता है और आरोपी को क्लीन चिट देना चाहता है ।

घटना की जांच के लिये जो कमेटी बनी है वह भी संदेह के घेरे में है । कमेटी में अनिल अंकित राय बतौर सदस्य रखे गए हैं । ये छात्र कल्याण विभाग को देखते हैं । कमेटी में इनकी मौजूदगी इसलिए संदेह के घेरे में हैं क्योंकि अनिल अंकित राय ए.बी.वी.पी. की विदर्भ यूनिट के उपाध्यक्ष हैं और इस मामले में आरोपी का संबंध ए.बी.वी.पी. से है । आरोपी के पक्ष में तमाम सहयोगी विद्यार्थियों का संबंध भी ए.बी.वी.पी. से है। ऐसी स्थिति में जांच को प्रभावित किया जा सकता है।

भंते का साथ देने वाले अम्बेडकरवादी छात्र पी.एच. डी. स्कॉलर रजनीश अम्बेडकर पर चंद्रभूषण सिंह द्वारा रैगिंग का फर्जी आरोप लगाया गया है। आरोप में यह कहा गया है कि रजनीश अम्बेडकर पिछले एक वर्ष से उन्हें जय भीम बोलने के लिए दबाव बनाते हैं और परेशान करते रहे हैं। इससे यह साफ जाहिर होता है कि निर्दोष छात्रों को फंसाने की कोशिश की जा रही है और भंते को अपमानित करने वाली घटना को दबाने की कोशिश की जा रही है ।

रिपोर्ट-राजेश सारथी

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