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जदयू के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव के गुप्तचरों पर मुख्यमंत्री नीतीश का डंडा

नई दिल्ली .जनता दल यूनाइटेड में चल रही आपसी खींचतान का विस्फोटक असर दिखने लगा है. पांच दिनों के अंदर नीतीश खेमे ने शरद यादव गुट पर दूसरा वार किया है.11 अगस्त को पार्टी ने राज्य सभा सांसद अली अनवर अंसारी को पार्टी के संसदीय दल से सस्पेंड कर दिया था जिसका एलान जदयू महासचिव के सी त्यागी ने किया था .



के सी त्यागी ने बताया था कि अली अनवर ने विपक्षी दलों की बैठक में हिस्सा लेकर पार्टी विरोधी काम किया था . इससे पहले मंगलवार को पार्टी महासचिव पद से अरुण श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया गया था.अरुण श्रीवास्तव पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने गुजरात राज्यसभा चुनावों में पार्टी के एक मात्र विधायक छोटू भाई वासवा को पार्टी नेतृत्व के फैसले से अवगत कराने में कोताही बरती थी और पार्टी विरोधी काम किया था.

सनद रहे कि गुजरात राज्य सभा चुनाव में जदयू के एकमात्र विधायक छोटू भाई वसावा ने पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल को वोट किया था, इसी वजह से पटेल की जीत हो सकी थी. इससे खफा पार्टी नेतृत्व ने पार्टी महासचिव अरुण श्रीवास्तव को यह कहते हुए पद से हटा दिया था कि उन्होंने पार्टी के फैसले से विधायक को सही तरीके से अवगत नहीं कराया था .



पार्टी से जुड़े सूत्रों का दावा है की जल्द ही पार्टी शरद यादव के अन्य गुप्तचरों को पार्टी से बाहर निकाल सकती है .जो दल में रह कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलग्न है .

सनद रहे जनता दल यूनाइटेड के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव से गुटबाजी की शुरुवात हुई थी ,लगातार चौथी बार सुरेश निरंजन भैया को प्रदेश अध्यक्ष पद पर ताजपोशी पार्टी के अध्यक्ष शरद यादव द्वरा कर दिया गया था ,नीतीश गुट के कार्कार्ताओ ने नाराजगी ब्यक्त करते हुए सुरेश निरंजन के अध्यक्ष पद पर मनोनयंन का विरोध किया था तब नीतीश गुट का समर्थक होने का आरोप लगाते हुए ७ कार्यकर्ताओ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गा था .

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