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94वें जन्मदिवस पर रामस्वरूप वर्मा को याद करेंगे जेएनयू के छात्र,मनुस्मृति जलाकर सामाजिक न्याय की मुकम्मल लड़ाई का लेंगे संकल्प

नई दिल्ली .. सामाजिक न्याय के नायक रामस्वरूप वर्मा के 94 वे जन्मदिवस पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविधालय में साबरमती ढाबे पर मनुस्मृति को जलाने का कार्यक्रम आज शाम 9.30 बजे आयोजित किया गया है. 14 अप्रैल 1978 में रामस्वरूप वर्मा ने अर्जक संघ के कार्यकर्ताओं से अपील किया था कि 14 अप्रैल से 30 अप्रैल तक मनुस्मृति और रामायण को जलाकर मनुष्य से मनुष्य का भेद करने वाली ब्राह्मणवादी व्यवस्था का बहिष्कार किया जाय .



कार्यक्रम के आयोजक सदस्य प्रशांत निहाल ने बताया कि आज महामना श्री रामस्वरूप वर्मा का 94वां जन्मदिवस है. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर के गौरी करन गाँव में 22 अगस्त 1923 को साधारण कुर्मी किसान परिवार में हुआ था . उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालाय से एमए और आगरा विश्विद्यालय से एलएलबी कि डिग्री प्राप्त कर सामाजिक चेतना और जागृती पैदा करने के लिए उन्होंने 1 जून 1968 को सामाजिक संगठन ‘अर्जक संघ’ की स्थापना किया .

रामस्वरूप वर्मा ने आंबेडकर के विचारों को उत्तर भारत में फैलाने का काम किया.जब लोहिया ने नारा दिया, “संसोपा ने बांधी गांठ, सौ में पावें पिछड़े साठ” तब इस नारे ने पिछड़ो को समाजवादी आंदोलन से जुड़ने के लिए प्रेरित किया बाद में वर्मा जी ने लोहिया से मतबेध होने पर संसोपा छोड़ दिया और शहीद जगदेव प्रसाद के साथ मिल कर 7 अगस्त 1972 को शोषित समाज दल का गठन किया. वर्मा जी ने अर्जक संघ के कार्यकरताओं से अनुरोध किया कि पुरे देश में अम्बेडकर के जन्मदिवस 14 अप्रैल को चेतना दिवस के रूप में मनाएं और 14 अप्रैल 1978 से 30 अप्रैल 1978 तक पूरे पखवाड़े रामायण और मनुस्मृती का दहन करें. रामस्वरूप वर्मा 1967, 1969, 1980, 1989 और 1991 में विधान सभा सदस्य रहे . 1967 की संबिद सरकार में वर्मा जी लोहिया की पार्टी संसोपा से जीत कर उत्तर प्रदेश विधान सभा पहुँचे और चौधरी चरण सिंह के सरकार में वित्त मंत्री बनाये गये और उन्होंने मुनाफे का बजट पेश किया था . जब बाबा साहब अम्बेदकर की किताब जातीभेद का उच्छेद और धर्म परिवर्तन को जब्त किया गया और रोक लगायी गयी तब रामस्वरूप वर्मा ने ललई सिंह यादव से याचिका दायर करवाए और केस जीते .



उन्होंने अम्बेडकर कि किताब को हर पुस्ताकालयों में उपलब्ध कराने की मुहीम चलायी . आज हम कुछ छात्र उनकी स्मृती में और उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए जेएनयू में मनुस्मृति का दहन करेंगे . आप लोगों से अनुरोध है कि आज शाम 9.30 बजे साबरमती ढाबे पर पंहुचकर कार्यक्रम में अपनी भागीदारी सुनिश्चत करें.

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