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उन्नाव:बस कुर्सी ही चाहत इनकी कुर्सी इनका धर्म रहा…

बीघापुर,उन्नाव। अलबेला साहित्यिक एवं सांस्कृतिक परिषद् रग्घूखेड़ा की 94वीं मासिक कव्य गोश्ठी सम्पन्न हुई जिसमें वाणी पुत्रों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से माँ वीणापाणि को नमन किया। गोष्ठी का शुभारम्भ फतेहपुर के कवि मृत्युन्जय पाण्डेय ‘राजन‘ की वाणी वंदना के साथ माँ षारदे के चित्र पर पुष्प दीप प्रज्वलित कर हुआ।इसके बाद अनिल वर्मा ने पढ़ा कि सदा बदनसीबी अपने जीवन भर ढोता रहा,रूखी सूखी खा कर फुटपाथों पर सोता रहा।इसके बाद मनोज कुमार ‘सरल‘ ने पढ़ा कि बच चकता नहीं अनूठे सत्य से कोई भी,जिसने जो बोया है वही तो काटेगा,सब कुछ छोड़ एक दिन जाना है यहां से, सभी के समक्ष वह दिन जरूर आएगा। कु0 प्रिया अरविन्द पाण्डेय ने पढ़ा कि बना कर रास्ते खुद के चला करना मेरी आदत,किसी की तयशुदा राहें मेरी मंजिल नहीं बनतीं।

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वहीं साहित्य वाटिका के सम्पादक अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए पहचाने जाने वाले डाॅ0 मान सिंह ने वर्तमान राजनीति व राजनेताओं पर करा प्रहार किया कि गिरगिट भी अब देख के इनको रंग बदलना भूल गए,इतने ये बेशर्म हुए कि नीति नियम सब भूल गए,बस कुर्सी ही चाहत इनकी, कुर्सी इनका धर्म रहा,मूल मंत्र केवल बस धन है राष्ट्र धर्म सब भूल गए।अपनी विशेष गीत विधा के लिए जाने जानेवाले नरेन्द्र आनंद ने पढ़ा- वेदना के शहर में संवेदना बहारी हुई है,राह तकती बस्तियों की पीर भी ठहरी हुई है,अब न आएगा कोई सूरज यहां तम को भगाने,क्यों कि सूरज और तम में दोस्ती गहरी हुई है।अवधी लोग गीतकार संजीव तिवारी ने पढ़ा- कटि गै फसल खेती जइसि कीन,वहै तुम्हरिउ जमीन वहै हमरिउ जमीन।तो रामकिशोर वर्मा ने पढ़ा-यूपी में सुधार हो रहा है इस बार, लगता है सड़कों का हर गड्ढा भर जाएगा,बिजली अठारह घण्टे मिलेगी जरूर भरपूर घर खेत वन बाग पानी पाएंगे। गोष्ठी में अन्य कवियों में रामदत्त रमण, भारत सिंह परिहार, रामप्यारे ‘चैम्पियन‘, योगेन्द्र कुमार,डाॅ0 महावीर सिंह आदि ने काव्य पाठ किया।अध्यक्षता अरविन्द पाण्डेय, संचालन कमलेष शुक्ल ‘कमल’ ने किया।

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