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लखनऊ विश्वविद्यालय कोर्ट चुनाव में पिछड़ो का दबदबा ,एडवोकेट अरुण पटेल का बर्चस्व

लखनऊ .लखनऊ विश्वविद्यालय में हुए विश्वविद्यालय कोर्ट के नए सदस्यों के चुनाव में पहली बार पिछड़ो का वर्चस्व कायम हुआ ,15 सीटो पर हुए चुनाव में 9 सीटो पर पिछड़े समाज के लोग विजयी घोषित किए गए .इस चुनाव में बतौर मतदाता पंजीकृत स्नातक विश्वविद्यालय प्रशासन पर इस बात का भी आरोप लगा रहे है कि हजारो वोटर्स विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियों के कारण चुनाव में मतदान से बंचित रह गए ,जिन्हें वोट हेतु पर्ची नहीं भेजा गया और न ही डुप्लीकेट पर्ची जारी हुए .

यह चुनाव कार्यकाल खत्म होने के 3 माह पूर्व हो जाना चाहिए किन्तु विश्वविद्यालय रजिस्ट्रार की मनमानी व हठधर्मिता की बजह से राज्यपाल के निर्देश पर 15 माह का कार्यकाल वीत जाने के बाद चुनाव संपन्न हुआ . चुनाव के बाद नवनिर्वाचित 15 सदस्यों के नामों की सूची विश्वविद्यालय प्रशासन ने जारी किया .इन्हीं निर्वाचित सदस्यों में से चार सदस्यों को विवि की कार्य परिषद के लिए चुना जाएगा.बताया जा रहा है कि जो सदस्य पिछली बार परिषद में रह चुके हैं इस बार उनकों इसमें शामिल नहीं किया जाएगा.

कमेटी में इस बार आठ नए सदस्य शामिल हुए हैं. कोर्ट में अरुण कुमार पटेल, देवी प्रसाद चौधरी, सुनीता पटेल, डॉ. विनीत सिंह, ज्योति कौल, डॉ. अशोक कुमार सिंह, डॉ.रमेश चंद्र गुप्ता, डॉ. सूर्यकांत, डॉ. राम कृष्ण जायसवाल, संतोष वर्मा, शिवपाल सिंह, अनिल कुमार सिंह, शिव सिंह, जगदीश प्रसाद व श्रीकांतमणि शुक्ला शामिल हैं.

एलयू के रजिस्ट्रार राज कुमार सिंह के अनुसार कार्यपरिषद के लिए अब इन 15 सदस्यों में से 4 का चुनाव कराया जाएगा. अभी उस चुनाव की तारीख तय नहीं की गई है. इस चुनाव में सिर्फ एलयू कोर्ट के चुने गए सदस्य और एलयू हेड व डीन ही वोट डालते हैं, जबकि एलयू कोर्ट के चुनाव में विवि के सभी रजिस्टर्ड स्नातक वोट देते हैं.

लगातार १९९२ से चुनाव जीतते आ रहे एडवोकेट अरुण कुमार पटेल ने मतदाता साथियो का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की पहचान देश समेत विदेशो में है .इस पहचान को और निखारने हेतु हमसब मिलकर कार्ययोजना बनाएँगे .उन्होंने विश्वविद्यालय के छात्र -छात्राओ को किसी भी समस्या की दशा में निरंतर उपलब्ध रहने का वचन भी दिया है .

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