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हिंदूवादी मुख्यमंत्री योगी के राज में शुद्रो का मंदिर में प्रवेश निषेध

लखनऊ .प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद के दलित हितैषी होने का कितना भी दावा करें, सवर्ण कितना भी दिखावे के लिए बाबा साहेब आंबेडकर की फोटो लगा लें। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमितशाह चाहे कितने भी दलितों के घर जाकर खाना खा लें किन्तु हिन्दुवाद में शुद्र हिन्दू नहीं है जिन्हें मंदिरों में प्रवेश हेतु रोका जाता है . छुआ- छूत और जातिवाद ऐसा सामाजिक कोढ़ है जिससे छुटकारा पाना आसान नहीं है.हिन्दुवाद के नाम पर सिर्फ भावनाए भड़काकर शुद्रो का इस्तेमाल किया जाता है .

हिन्दुवाद का नारा देने वालो के राज में यह जातिवाद और छुआ-छूत की ताज़़ा घटना उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में हमीरपुर जिले के मौदहा के गढ़ा गांव की है. जहां रामजानकी मंदिर के पुजारी के जातिवादी फरमान के चलते गावों के दलितों में आक्रोश है.



वहीं इस घटना पर सामाजिक चिंतकों ने कड़ी प्रक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बार-बार अपमानित होने और पीटे जाने के बाद भी दलित मंदिर में करने क्या जाते हैं? मंदिर कोई स्कूल या अस्पताल तो है नहीं कि वहां बिना जाए दलितों का उद्धार नहीं होगा.

दरअसल मंदिर के पुजारी कुंवर बहादुर सिंह ने दलितों के मंदिर में प्रवेश करने पर रोक लगा दी है. यहां तक मंदिर में रामायण का पाठ करने पहुंचे दलित बच्चे को मंदिर के पुजारी फटकार लगाई और उसे वहां से भगा दिया. पुजारी ने कहा कि मंदिर उसके पुरखों का है इसलिए यहां गांव का कोई भी दलित नहीं आ सकता.



रामजानकी मंदिर में एक पखवाड़े से रामायण का पाठ चल रहा है. मंदिर के पुजारी ने गेट पर एक बोर्ड टांग दिया है जिस पर लिखा है, मंदिर में दलितों का प्रवेश वर्जित है .इसका मतलब साफ़ हुआ कि दलित शुद्र हिन्दू नहीं है .

गांव में रहने वाले उमाशंकर श्रीवास ने बताया कि उनका भतीजा अपने साथी के साथ रामायण का पाठ करने मंदिर गया था, जिसे पुजारी ने घुसने से रोक दिया. शिकायत मिलने पर एसडीएम सुरेश मिश्रा ने कानूनगो और लेखपाल को जांच के लिए भेजा है.

एसडीएम के मुताबिक मंदिर में दलितों के जाने पर पाबंदी लगाने की जानकारी मिली है. राजस्व विभाग की टीम को निरीक्षण के लिए गांव भेजा गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी.

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