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लागत बढ़ जाने के बहाने कर मिड-डे-मील में अरहर की दाल देने से मोदी सरकार का इंकार

नई दिल्ली.बच्चो को उच्च शिक्षा देने का दावा करने वाली भाजपा सरकार ने स्कूल के बच्चों को अरहर की दाल देने से मना कर दिया है. इसकी मुख्य वजह बढ़ जाना बताया गया है .देश में अरहर दाल का पर्याप्त भंडार होने के बीच मोदी सरकार ने उसे मध्यान भोजन योजना और कॉलेजों के होस्टल के मेस में खाने की सूची में अरहर दाल को शामिल करने से केंद्र की मोदी सरकार से इंकार कर दिया है.

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दरअसल खाद्य मंत्रालय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मध्यान भोजन योजना और कॉलेजों के हॉस्टल के मेस में खाने की सूची में अरहर दाल को शामिल करने के लिए संपर्क किया, लेकिन मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया है.मानव संसाधन विकास मंत्रालय का मानना है कि वह देश के होस्टलों के मेस में खाने की पसंद तय नहीं कर सकती.एचआरडी मंत्रालय ने तर्क दिया कि मध्यान भोजन में अरहर दाल को शामिल किये जाने से प्रति छात्र लागत बढ़ जाएगी, क्योंकि इसकी कीमत अधिक है. केंद्र ने इस वर्ष अरहर दाल के उत्पादन के संबंध में सतर्कता बरती है, जिसकी कीमत पिछले वर्ष 180 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी .

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कालाबाजारी के कारण कीमतों में काफी वृद्धि की आशंका को देखते हुए सरकार ने खरीद एजेंसियों को इस वर्ष दाल का भंडारण करने को कहा था,हालांकि पर्याप्त भंडार के मद्देनजर इस वर्ष कीमत गिरकर 700 रुपये से 50 रुपये प्रति किलोग्राम आ गई है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय ने हमसे संपर्क किया है और पूछा है कि क्या दाल के भंडार का मध्यान भोजन और कॉलेजों के हॉस्टल के मेस में उपयोग किया जा सकेगा,हालांकि इस विचार पर सहमति नहीं बन पाई है.

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