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मोदी सरकार का विकास : ने तीन साल में 126% बढ़ाया उत्पाद शुल्क, 31 रुपए के पेट्रोल का जनता दे रही 79

नई दिल्ली .पिछले कुछ दिनों से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आलोचनाओं से घिरी हुई है. पेट्रोल-डीजल की कीमतो की दैनिक समीक्षा की मौजूदा नीति भी आलोचनाओं के घेरे में है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बुधवार को मीडिया के इस बाबत पूछे गये सवाल के जवाब में कहा कि दैनिक समीक्षा की नीति जारी रहेगी. पिछले एक महीने में पेट्रोल की कीमत में सात रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है.भाजपा की मोदी सरकार ने 16 जून से पेट्रोल की कीमतों की दैनिक समीक्षा नीति लागू की है. उससे पहले तक पेट्रोल की कीमतों की पाक्षिक समीझा होती थी.

आइए समझते हैं कि आखिर पेट्रोल की कीमतों को लेकर विवाद क्यों है?

गुरुवार को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 70.39 रुपये प्रति लीटर, कोलकाता में 73.13 रुपये प्रति लीटर, मुंबई में 79.5 रुपये प्रति लीटर और चेन्नई में 72.97 लीटर रही. पेट्रोल की ये कीमत अगस्त 2014 के बाद सर्वाधिक है. भारत में पेट्रोल तब भी महँगा है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पिछले कुछ सालों में काफी कम हुई हैं, लेकिन भारतीय ग्राहकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने का लाभ नहीं मिल रहा है.

नरेंद्र मोदी सरकार का कहना है कि भारत को आधारभूत ढांचे के विकास के लिए पैसा चाहिए इसलिए वो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने का लाभ ले रही है. मोदी सरकार ने तेल पर अतिरिक्त टैक्स लगाया है ,जिसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत कम होने के बावजूद भारत में कीमत कम नहीं हो रही है.

श्रोत -जनसत्ता

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