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अंग्रेजो की दलाली कर देश का लुटेरा है RSS

नई दिल्ली .देश में राष्ट्रवाद कि चर्चा जोरो पर है ,केंद्र की मोदी सरकार के नीतियों का विरोध करने पर देशद्रोह का ठप्पा लगा दिया जाता है .असल में राष्ट्रवाद का ढिढोरा पीटने वाली आरएसएस का वास्तव में राष्ट्रवाद से कोई नाता है या सिर्फ हिन्दुत्व वाद के नाम पर लोगो को गुमराह कर राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाया जाता है .आर एस एस के वास्तविक राष्ट्रवादी सोच को देखना हो तो भारतीय स्वतन्त्र संग्राम के इतिहास पर नज़र डालते ही समझ में आ जाता है कि यह एक बुरे राजनीतिक चुटकुले से ज़्यादा और कुछ भी नहीं है. संघ के किसी भी नेता ने कभी भी ब्रिटिश सरकार के खिलाफ़ अपना मुँह खोलने कि जुर्रत नहीं किया . जब भी संघी ब्रिटिश सरकार के निशाने पर आए तो उन्होंने बिना किसी हिचक के माफ़ीनामाँ लिख कर, अंग्रेजी हुकूमत के प्रति अपनी वफ़ादारी साबित की है.आर एस एस ने किसी भी ब्रिटिश साम्राज्यवाद विरोधी आन्दोलन में हिस्सा नहीं लिया. ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ के दौरान संघ ने उसका बहिष्कार तक किया, संघ ने हमेशा ब्रिटिश शासन के प्रति अपनी वफ़ादारी बनायी रखी और देश में साम्प्रदायिकता फैलाने का अपना काम बखूबी किया.

देश में साम्प्रदायिकता वास्तव में फैलाने की पूरी साज़िश तो ब्रिटिश उपनिवेशवादियों के ही दिमाग़ की पैदावार थी और ‘बाँटो और राज करो’ की उनकी नीति का हिस्सा थी. लिहाज़ा, संघ के इस काम से उपनिवेशवादियों को भी कभी कोई समस्या नहीं थी. ब्रिटिश उपनिवेशवादी राज्य ने भी इसी वफ़ादारी का बदला चुकाया और हिन्दू साम्प्रदायिक फ़ासीवादियों को कभी अपना निशाना नहीं बनाया. आर.एस.एस. ने हिन्दुत्व के अपने प्रचार से सिर्फ़ और सिर्फ़ साम्राज्यवाद के ख़िलाफ़ हो रहे देशव्यापी आन्दोलन से उपजी कौमी एकजुटता को तोड़ने का प्रयास किया. ग़ौरतलब है कि अपने साम्प्रदायिक प्रचार के निशाने पर आर.एस.एस. ने हमेशा मुसलमानों, कम्युनिस्टों और ट्रेड यूनियन नेताओं को रखा और ब्रिटिश शासन की सेवा में तत्पर रहे. संघ कभी भी ब्रिटिश शासन-विरोधी नहीं था, यह बात गोलवलकर के 8 जून, 1942 में आर.एस.एस. के नागपुर हेडक्वार्टर पर दिए गए भाषण से साफ़ हो जाती है – “संघ किसी भी व्यक्ति को समाज के वर्तमान संकट के लिये ज़िम्मेदार नहीं ठहराना चाहता. जब लोग दूसरों पर दोष मढ़ते हैं तो असल में यह उनके अन्दर की कमज़ोरी होती है. शक्तिहीन पर होने वाले अन्याय के लिये शक्तिशाली को ज़िम्मेदार ठहराना व्यर्थ है.…जब हम यह जानते हैं कि छोटी मछलियाँ बड़ी मछलियों का भोजन बनती हैं तो बड़ी मछली को ज़िम्मेदार ठहराना सरासर बेवकूफ़ी है. प्रकृति का नियम चाहे अच्छा हो या बुरा सभी के लिये सदा सत्य होता है. केवल इस नियम को अन्यायपूर्ण कह देने से यह बदल नहीं जाएगा.संघ हमेशा से गोरो का समर्थक रहा है किन्तु आज के हालत में राष्ट्रवाद ,देशभक्ति का पाठ भी इन्ही संघियों द्वारा पढ़ाया जा रहा है .

संघियों के पिछले उपलब्धियों और देश प्रेम को पुनः पिछड़े समाज से ताल्लुक वाली किरण यादव ने उठाया है . किरण यादव ने लिखा है कि आप सब जानते हम सबके पूर्वज पर अंग्रेज़ो ने पुलिस के जरिए किस तरह अत्याचार किया . उसी अंग्रेज़ की गन्दी खून हैं भारतीय जनता पार्टी , आरएसएस वाले हम सबके पूर्वज अंग्रेज को भगाने के लिए गोली डण्डे खा रहे थे किन्तु भारतीय जनता पार्टी , आरएसएस वाले अंग्रेज की दलाली कर देश लूट को लूट रहे थे . आरएसएस जगल -ज़मीन पर कब्जा करने में लगा था . आज वही अंग्रेजो वाले दिन हिन्दुस्तान को याद आ रही है किसान आवाज़ उठाया तो गोली मार दे रही हैं ,युवा आवाज़ उठाया तो देशद्रोही बोल देता है, जब बहने नो काशी विश्वविद्यालय में आवाज उठाया तो 12 बजे रात में गर्ल्स होस्टल में पुलिस घूस कर हाथ पैर तोड़ दे रही है . गन्दी- गन्दी गालीया दी गई .अंग्रेजो ने यही काम किया था , हिन्दुस्तान को लुटना गरीब किसान मजदूर को लूटना युवा आवाज़ उठाए तो उसे गोली मार देता ,जनता आवाज़ उठाए तो जालियाँ वाला बाग जैसा कांड कर देना . चार साल से यही हिन्दुस्तान में हो रहा हैं, हम सबको देशभक्त की आड़ लेकर लूट रहा, गुलाम बना रहा हैं.

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