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क्‍या यूपी विधानसभा अलकायदा के निशाने पर आ गई है,यदि नहीं तो सरकार इतना डर क्‍यों गई?

लखनऊ : विधानसभा के भीतर ऐसे विस्‍फोटक पाउडर का मिलना, जिससे बिना जिलेटिन के कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता, क्‍या किसी सोची समझी साजिश का हिस्‍सा हो सकता है? दरअसल, सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि विधानसभा के भीतर विस्‍फोटक पाउडर पहुंचाना किसी भी बाहर व्‍यक्ति के लिए संभव नहीं है। यह तभी संभव है जब भीतर का कोई व्‍यक्ति भी इस साजिश में शामिल हो? यह अत्‍यंत ही एक्‍सप्‍लोसिव होता है और इसका इस्‍तेमाल आतंकी संगठन करते हैं।

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अब सवाल उठ रहा है कि यह विस्‍फोटक किस उद्देश्‍य से विधानसभा के भीतर पहुंचाया गया। पहुंचाने वाले की मंशा क्‍या थी, जब इससे अकेले कोई नुकसान नहीं पहुंच सकता था तो यह विधानसभा के भीतर पहुंचाकर क्‍या संदेश देने की कोशिश की गई? क्‍या यूपी विधानसभा अलकायदा के निशाने पर आ गई है? यदि नहीं तो सरकार इतना डर क्‍यों गई?

मामला कुछ भी हो, अब इस घटना की बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रदेश की जनता के पैसे से करोड़ों के सुरक्षा उपकरण खरीदे जाएंगे। सुरक्षाकर्मियों के लिए हथियार तथा उसी अनुपात में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जाएगी। सुरक्षा के नाम पर करोड़ों का खर्च किए जाएंगे। विधानसभा की सुरक्षा निहायत ही जरूरी है, लेकिन सारे सवाले से बड़ा सवाल यह है कि यह अत्‍यंत विस्‍फोटक पाउडर विधानसभा की सीट नंबर 80 तक पहुंचा कैसे?

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क्‍या यह सचमुच विधायकों को नुकसान पहुंचाने के लिए वहां रखा गया था या किसी ने दूसरी मंशा से यह पाउडर रखा था? या किसी दूसरे खेल को अंजाम देने के लिए जानबूझकर यह दहशत फैलाने की साजिश रची गई। सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि इस पाउडर ने करोड़ों रुपए के बजट का इंतजाम कर दिया है। अब आम जनता के हित में खर्च होने वाला बजट विधानसभा की सुरक्षा पर खर्च होगा, और विधानसभा के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है।



यह सवाल इसलिए है कि जिस विधानसभा में उत्‍तर प्रदेश पुलिस का दखल तक नहीं होता था, वहां की जांच एनआईएस के हवाले, सुरक्षा एटीएस, क्‍यूएसटी के हवाले रहेगी। विधानसभा के प्रवेश द्वार पर एक्‍सरे मशीन लगेगी, आनन-फानन में दैनिक आगंतुकों के पास निरस्‍त कर दिए गए हैं। मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया है कि विधानसभा एवं कार्यालयों में कम से कम लोगों को बुलाएं।

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अब विधायकों की भी विधानसभा में प्रवेश करने पर तलाशी ली जाएगी। इसके अलावा विधानसभा के सभी प्रकार के पासों की फिर से समीक्षा की जाएगी। विधायकों को अपने परिचालकों का पास बनाने के लिए भी सत्‍यापित करना पड़ेगा। क्विक रिस्‍पांस टीम यानी क्‍यूआरटी और एंटी टेरिरिस्‍ट स्‍क्‍वायड विधानसभा में मौजूद रहेगी।



इस संदर्भ में कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि विस्‍फोटक मिलने वाली जगह पर केवल विधायक, मंत्री, सुरक्षाकर्मी तथा सफाईकर्मी ही जाते हैं। गौरतलब है कि 500 ग्राम पीईटीएन के जरिए पूरे विधानसभा को उड़ाया जा सकता है। भाजपा विधायक सुरेश चंद्र श्रीवास्‍तव ने कहा कि अगर यह पाउडर आतंकी इस्‍तेमाल करते हैं तो इस बात‍ की जांच होनी चाहिए कि कौन लोग ऐसे हैं, जिनके तार आतंकियों से जुड़े हो सकते हैं?

  • मनोज श्रीवास्‍तव (लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार है )

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