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साईकिल की सवारी करेंगे नसीमुद्दीन,राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा का हो जाएगा सपा में विलय

लखनऊ .नीले झंडे के साथ सामाजिक परिवर्तक काशीराम के सानिध्य में अपने राजनैतिक कैरियर की सुरुवात करने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब समाजवादी पार्टी में शामिल होंकर साईकिल की रफ़्तार बढाएंगे .

बहुजन समाज पार्टी के कद्दावर नेता रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी बहुजन समाज पार्टी में एक बड़े वोट बैंक के अगुआ रहे,अल्प्संख्यक समाज में बसपा की पैठ का श्रेय इन्ही को जाता है.बहुजन समाज पार्टी में रास्ट्रीय महासचिव रहे नसीमुद्दीन को बीते विधानसभा चुनाव के बाद बहुजन समाज पार्टी की बुरी हार से कुपित होकर बसपा सुप्रीमो द्वारा पार्टी विरोधी गतिबिधियो में शामिल होने का आरोप लगाकर पार्टी से बहार का रास्ता दिखा दिया गया था .

बसपा से निष्कासन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती के ख़ास सिपहसालार रहे नसीमुद्दीन ने कहा था कि मुझे झूठे आरोप लगाकर पार्टी से निकाला गया. मायावती ने मुझे काफी उल्टा-सीधा कहा. मायावती ने कांशीराम के बारे में जो कहा मैंने उसका विरोध किया था. मैंने मायावती को हार के कारणों के बारे में बताया था जिस पर वह नाराज हो गई थीं. यही नहीं मायावती ने मुझसे पैसे की मांग की. पार्टी को 50 करोड़ रुपये की जरूरत है. मैंने कहा कि मैं कहां से लाऊं तो बोलीं अपनी प्रॉपर्टी बेच दो. मैंने कहा कि अगर मैं अपनी प्रॉपर्टी बेच भी दूंगा तो 50 करोड़ का चौथाई भी हो जाए तो बड़ी बात है. मैंने ये भी कहा कि नोटबंदी के बाद अगर प्रॉपर्टी बेचूंगा तो भी कैश नहीं मिलेगा. लेकिन पार्टी हित के लिए मैं ये करने को भी तैयार हूं. इसके बाद मैंने अपने दोस्तों-रिश्तेदारों से कहा कि कुछ करें. पार्टी के लोगों से कहा कि मेरी प्रॉपर्टी बिकवा दो. जब थोड़ा पैसा इकट्ठा हो गया तो मैंने बहनजी को कहा कि पैसा इकट्ठा हो गया है.

सीमुद्दीन ने आरोप लगाया था कि 'मायावती, उनके भाई आनंद कुमार और सतीश चंद्र मिश्रा द्वारा अवैध रूप से, अनैतिक रूप से और मानवता से परे कई बार ऐसी मांगें की गईं, जो मेरे बस में नहीं थीं. कई बार मुझे मानसिक प्रताड़ना दी गई, टार्चर किया गया. जिसके पुख्ता प्रमाण मेरे पास हैं.' नसीमुद्दीन ने कहा, '2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव और 2012 व 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को मायावती की गलत नीतियों के कारण सफलता नहीं मिली. उन्होंने मुसलमानों पर गलत झूठे आरोप लगाए.' उन्होंने कहा, '2017 के चुनाव से काफी पहले से मैंने पार्टी के लिए जो प्रयास किए, उसी का नतीजा था कि बसपा को 22 प्रतिशत से अधिक वोट मिले. नहीं तो स्थिति और बदतर होती. शिकस्त के बाद मायवती ने मुझे बुलाया और अपर कास्ट, बैकवर्ड कास्‍ट को बुरा-भला कहने के साथ ही खासतौर पर मुसलमानों के लिए अपशब्द कहे, जिसका मैंने विरोध किया था.

क्रिया प्रतिक्रिया के बाद साथ जुड़े अल्पसंख्यक वोट बैंक पर अपनी पकड़ बनाए रखने हेतु नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा नामक एक राजनैतिक दल का गठन कर काम करना प्रारंभ कर दिया किन्तु अब इस बात की चर्चा है की बसपा सुप्रीमो मायावती से 36 का आकड़ा रखने वाले समाजवादी पार्टी के साईकिल की सवारी हेतु नासिमूदीन तैयारी कर रहे है .

बताया जाता है कि 5 अक्टूबर को नसीमुद्दीन सिद्दीकी अपने हज़ारों समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी के आगरा में होने वाले राज्य स्तरीय अधिवेशन में सपा में शामिल होकर राष्ट्रीय बहुजन मोर्चा का विलय करेंगे ,इस अधिवेशन में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष का भी चुनाव होगा.जहां वर्तमान रास्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का औपचारिक रूप से अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय है. वहीं नसीमुद्दीन बीएसपी से समाजवादी पार्टी में आने वाले सबसे बड़ा चेहरा होंगे. नसीमुद्दीन का समाजवादी पार्टी में जाना सपा-बसपा एकता में खलल के रूप में देखा जा सकता है.

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