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भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी के पूर्व में दर्ज 420 के खबर को घोट गई बिकाऊ मीडिया

नईदिल्ली .देश में आवास उपलब्ध कराने का झाषा देकर बास्तु विहार ने लोगो को खूब झाषा दिया और अरबो कि चपत लगा कुंडली मार बैठे है .वास्तु विहार घोटाले में अलग-अलग जगहों पर मुकदमों का सिलसिला तो कब का चल रहा है किन्तु तथाकथित मनुवादी मीडिया अपने पंडित मनोज तिवारी के बिरुद्ध खबर दिखाने कि मानो कसम खा लिया है ,माना जाता है कि मीडिया वाले भाजपा के शीर्ष नेताओं और केंद्र-राज्य की सरकारों के दबाव / प्रलोभन के कारण मनोज तिवारी के खिलाफ कुछ नहीं छाप/दिखा रहे हैं. मनोज तिवारी की जगह अगर यही आरोप कांग्रेस ,सपा ,बसपा या आप के किसी नेता पर लगा होता तो सारे चैनल पूरे दिन इसी घोटाले के गड़े मुर्दे खोदते रहते. इसे ही कहते हैं मीडिया का नंगा और दोगला चरित्र .

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दरभंगा में भाजपा नेता मनोज तिवारी के खिलाफ चीटिंग व फ्राड का केस फाइल होने के पहले भी एक मुकदमा पटना में दर्ज हुआ था जिस मुकदमे में भाजपा का यह नामी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी आरोपी है .वास्तु विहार के पटना वाले मुकदमे में भाजपाई सांसद सफेदपोश मनोज तिवारी समेत कुल नौ लोगों के नाम हैं जो आरोपी वास्तु विहार कंपनी से संबद्ध हैं. मुकदमा एक वकील की पत्नी ने दर्ज कराया जिसने वास्तु विहार कंपनी से एक प्लाट बुक कराया था लेकिन कंपनी न तो प्लाट दे रही और न ही पैसे लौटा रही है.

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पटना के गांधी मैदान पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में शिकायतकर्ता रानी देवी ने कहा है कि उसने 2013 में वास्तु विहार कंपनी में 7.86 लाख रुपये निवेश कर दो हजार स्क्वायर फीट का एक प्लाट बुक कराया. उसने यह कदम मनोज तिवारी द्वारा वास्तु विहार कंपनी के ब्रांड एंबेसडर होने और इनके द्वारा वास्तु विहार कंपनी के प्रोजेक्ट का प्रचार प्रसार किए जाने के कारण उठाया. कंपनी ने प्लाट की रजिस्ट्री तो की लेकिन कभी भी प्लाट हैंडओवर नहीं किया. उन्होंने पैसा भी नहीं लौटाया. रानी देवी, जो खुद शिक्षिका हैं और एक वकील की पत्नी हैं, ने मीडिया को बताया था कि मनोज तिवारी का नाम एफआईआर में इसलिए डाला गया क्योंकि उन्होंने एक फ्राड कंपनी को प्रमोट किया जिसके कारण हजारों निर्दोष लोगों का पैसा फंस गया.

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