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दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का समय 5.45 से 8.30 तक

लखनऊ . दीपावली में लक्ष्मी पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय शाम 5.45 से रात्रि 8.30 बजे तक गोधूलि बेला और वृष लग्न से युक्त है। वृष लग्न शाम 6.31 बजे से 8.27 बजे तक है। यह शुभ मुहूर्त है। इस अवधि में की गई लक्ष्मी पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होगा। इस साल दीपावली 30 अक्टूबर को मनाई जा रही है। गोधूलि बेला वृष लग्न और सिंह लग्न में कुबेर और इंद्र का पूजन भी श्रेष्ठ है।

सिंह लग्न अशुभकारी

काशी में अखिल भारतीय विद्वत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव कामेश्वर उपाध्याय के अनुसार इस वर्ष सिंह लग्न अशुभकारी है। लग्न में बैठा राहु सिंह लग्न को पापग्रस्त कर रहा है। अत: इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ पूजनकाल गोधूलि बेला से वृष लग्न तक है। मिथुन लग्न में लक्ष्मी की आराधना का फल मध्यम होता है। रात्रि 8.30 से रात्रि 10.45 बजे के मध्य मिथुन लग्न है। इस लग्न में भी लक्ष्मी की पूजा होगी। इसके आगे कर्क व सिंह लग्न शुभ फलदायी नहीं है।

स्वाति नक्षत्र एवं प्रीति योग

इस वर्ष रविवार, स्वाति नक्षत्र एवं प्रीति योग के संयोग से दीपावली अत्यंत शुभ फलदायी है। अनेक साधक स्वर्णाकर्षण भैरव मंत्र का भी प्रयोग करते हैं। षोडशोपचार विधि से लक्ष्मी, कुबेर व इंद्र का पूजन करने के उपरांत श्रीसूक्त एवं कनकधारा स्त्रोत का पाठ करना श्रेयस्कर होता है। भगवती लक्ष्मी की प्रीति के लिए बेल की लकड़ी, बेल की पत्ती व बेल के फल से हवन करना चाहिए। इसके अलावा कमल पुष्प व कमल गट्टा से किया गया हवन विशेष फलदायी होता है। लक्ष्मी की पूजा के बाद रात्रि जागरण करने व भोर में दरिद्रा निस्तारण का भी विधान शास्त्रों में बताया गया है।

अन्नकूट व गोवर्धन पूजा कल

दीपावली के दूसरे दिन 31 अक्टूबर को अन्नकूट व गोवर्धन पूजा का विधान है। इस दिन देवालयों में तरह-तरह के पकवान बनाकर देव विग्रहों को अन्नकूट का भोग लगाया जाता है। साथ ही गोमाता को नूतन वस्त्र आदि से सुसज्जित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।

भैयादूज व चित्रगुप्त पूजा एक को

पांच दिवसीय ज्योतिपर्व दीपावली का समापन एक नवंबर को भैयादूज व चित्रगुप्त पूजन से होगा। भैयादूज की पूजा दोपहर एक बजे व चित्रगुप्त की पूजा अपराह्न 2.30 से 4.30 बजे के मध्य होगी।

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