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खानाबदोश सरकारी मुलाजिम हूं….पेशे से PCS सामाजिक चिंतक डॉ. राकेश पटेल की कविता

लखनऊ .डॉ. राकेश पटेल उत्तर प्रदेश में पीसीएस अधिकारी हैं. जेएनयू से पीएचडी करने वाले राकेश पटेल बेहद ही सामाजिक,चिंतनशील व्यक्ति व्यक्तित्व के धनी हैं. डॉ. राकेश पटेल अपने अधिकारीपन के घमंड से दूर वंचितों के अधिकारों की की बात करते हैं और बढ़ चढ़कर गरीबों-किसानों के काम भी करते हैं. उनका मानना है कि समाज में अधिकारियों और नेताओं से ज्यादा तवज्जो लेखकों-पत्रकारों-कवियों और बौद्धिक लोगों को मिलनी चाहिए.

लीजिए अपने काम से समय निकालकर राकेश कबीर द्वारा लिखी एक कविता-

खानाबदोश

सरकारी मुलाजिम हूँ

खानाबदोश हूँ पेशे से

एक दर्द लिये फिरता हूँ

इस शहर से उस शहर तक

बांधे रोजमर्रा की ज़रूरतें.

मोह रख लेता हूँ

चन्द दिनों के आशियानों से

और बेशक तेरे शहर से भी

फिर आता है फरमान निजाम का

और समेट लेता हूँ खुद को

चल देता हूँ अगले सफर पे.

पर रह जाती हैं बेशुमार य़ादें

जो खुलती रहतीं है परत दर परत

य़े मुसलसल खानाबदोश सफर

य़े आशियाने य़े शहर दर शहर

मोह का पुलिन्दा घना होता जाता है

और मैं अमीर होता जाता हूँ.

— राकेश कबीर

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