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गरीबों के निवाले पर घूसखोरों का ग्रहण,घूसखोर अधिकारी हुआ कैमरे में कैद

        सप्लाई चालू करने की एवज में मांग रहे रिश्वत,14 हजार की घूस लेते अधिकारी हुआ कैमरे में कैद

पवन कुमार

देश व् प्रदेश की सरकारें जहां भ्र्ष्टाचार को खत्म करने की बात कह रही है वहीं अधिकारी है कि अपनी हरकतों से बाज ही नहीं आ रहे। सरकारी राशन की दुकानों पर गरीबी रेखा में आने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाला गैहूँ को ही डकार जा रहे है। कोसली के गांव झोलरी में डिपोधारक गुलशन से अनिल सहायक खाद्य आपूर्ति अधिकारी सप्लाई चालू करने की एवज में अब तक 90 हजार रूपये रिश्वत के तौर पर हड़प चुका है। लेकिन इसका सबूत नहीं होने की वजह से वह इनके खिलाफ कुछ नहीं कर सका। गत दिवस अधिकारी अनिल ने 14 हजार रूपये फिर मांगें तो डिपो धारक गुलशन ने इस घटना को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और मीडिया को सौप  दिया। इस बारे में जब मीडिया ने आला अधिकारियों से जानना चाहा तो उन्होंने कैमरे पर आने से मना कर दिया। आप तस्वीरों में देख सकते है कि अधिकारी की तरह अपना जमीर बेचकर गरीबों के निवाले का सौदा कर रहे है। अब आप स्वयं ही अंदाजा लगा सकते हो की भष्टाचार किस  कद्र सरकार पर हावी है। अब देखना यह होगा की इस रिश्वतखोर अधिकारी का सरकार क्या करेगी या फिर यह खेल यू हीं चलता रहेगा।

क्या है रिकार्डिंग में  –

ए ऍफ़ एस ओ अनिल कुमार

गुलशन साहब मेरी इन्क्वारी सब इस्पेक्टर विनोद जानबूझकर मेरे को तंग करता है , जानभूझकर इन्क्वारी खुलवा कर आपके सायन करवा लेता है.
पहले सीएम विडों की इन्क्वारी के 20000 आपको दिए आपको दिए संगीत के माध्यम से फेर विनोद सब इंस्पेक्टर को प्रेमपाल(जो की डीएफएससी है ) की इन्क्वारी में 10000 दिए.
अनिल एएफएसओ 50000 रुपये विभाग ने तुम्हे भी तो दिए है.
गुलशन साहब वो तो सभी के थे
गुलशन यह लो जी
अनिल एएफएसओ कितने है
गुलशन 14000 है
अनिल एएफएसओ 14000 में तो असर रह गयी
गुलशन गीन लो जी
और इन्क्वारी ख़तम हियरिंग 06 फरवरी की थी और डिपो 04 फरवरी को ही खुल जाता है लेटर अटैच्ड
गुलशन कुमार जो झोलरी गाव का डिपो होल्डर है गरीब परिवारों को राशन बाटता है इतना आहात हो गया की उसने कई चौकाने वाले खुलासे किये यदि उसकी बाते सच है तो पूरा प्राशानिक खेमा गरीबो का राशन खाने में जुटा हुआ है .हर इन्क्वारी की एक कीमत है यहाँ तक की सीएम विडों की शिकायत का निपटारा एक कीमत पर होता है. गुलशन के अनुसार डिपो होल्डर की कभी हिम्मत नहीं होती की वो राशन बेच दे महकमा जबरदस्ती बिकवाता है .मेरा सितम्बर का गेहू अनिल  एएफएसओ और सब इंस्पेक्टर विनोद ने बिकवा दिया (जिसको इनकी बहस में बीलिंग बोलते है ) सितम्बर माह में मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ सप्लायर का मुनीम मेरे पास गया था और मैंने  साइन कर दिए और लिख दिया बाई प्रेशर। फीर सप्लाई बंद और सप्लाई खुलवाने के पैसे. मेरी सप्लाई बंद कर दी गयी मैंने डीलिंग क्लर्क रेवाड़ी से बात की तो उन्होंने कहा की विनोद सब इंस्पेक्टर और एएफएसओ अनिल नहीं चाहता की आपकी सप्लाई खुले आप उनसे बात करे जब उक्त अधिकारियो से बात की तो विनोद सब इंस्पेक्टर नें एक डिपो होल्डर कल्याण के शादी समोराह में मुझे बुलाया और कहा की 20000 रुप्ए  लगेंगे जिसमे 6000 मेरे और 14000 एएफएसओ को देने पड़ेंगे और मैंने दे दिए तो मेरी हिर्रीगं 6 फरवरी की थी लेकिन पैसा देते ही हिर्रीगं से पहले ही मेरा डिपो खोल दिया गया.
अब आती है पूरे खेल की वास्तिवकता क्या मिलता है डिपो होल्डर को गेहू जिसके 2 रुपये प्रति किलोग्राम डिपो होल्डर भरता है और गेहू का उठान करता है उसे मिलते है 4 रुप्प्ये (2 रुपये प्रति किलोग्राम का फायदा ) गेहू की बाजार कीमत आज 14 रुप्प्ये प्रति किलोग्राम है बचे 10 रुप्प्ये उसे खाते है अधिकारी ट्रांसपोर्टर और जांच अधिकारी बायोमेट्रिक प्रणाली को भी धता बता दिया गया है क्योंकि इन्टरनेट कनेक्टिविटी का बहाना बनाया जाता है कोसली में 47 डिपो है और सभी पर यह काम क्रम  अनुसार किया जाता है हर  इन्कवैरी  बिकती है और उसकी एक कीमत है चाहे वो सीएम विंडो हो या क्रास  इन्क्वारी .

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