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25 हजार हिन्दुओ ने किया हिन्दू धर्म को गुडबाय,बुद्ध की शरण में पहुचे

उत्तर प्रदेश व गुजरात में हजारो हिन्दुओ ने बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया,मनुवादी मीडिया में नहीं दिखी खबर 

 

कानपुर. दशहरे के दिन एक तरफ रावण के पुतला दहन की तैयारी चल रही थी तो दूसरी तरफ हिन्दूओ का एक बड़ा समूह छुआ -छूत के भेदभाव वाले हिन्दू धर्म को तिलांजलि देकर भगवान बुद्ध की शरण को स्वीकार कर रहा था .

कानपुर देहात के पुखरायां कस्बे में ही विजय दशमी के दिन 25000 हजार हिन्दू दलित समाज के लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हुए धर्म परिवर्तन कर भगवान बुद्ध की शरण में पहुच गए .धर्म परिवर्तन से पूर्व दलित हिन्दुओ ने पूरे इलाके में ढोल नगाड़े के साथ वृहद् बुद्धमय जुलूस निकाला.

राष्ट्रीय दलित पैंथर के प्रदेश अध्यक्ष धनीराम पैंथर ने बताया कि सम्राट अशोक ने विजयदशमी के दिन ही बौद्ध धर्म अपनाया था और इसी दिन डॉ. भीम राव अम्बेडकर ने भी बौद्ध की दिक्षा गृहण कर ली थी. हिन्दू धर्म में हम दोयम दर्जे के हिन्दू समझे जाते है जिस कारण हमारी जाती के लोगों को लोग गलत नजर से देखते हैं. इसी के चलते हमलोग धर्म परिवर्तन करने को मजबूर हो रहे हैं.

अध्यक्ष धनीराम पैंथर ने बताया कि हमारे पूर्वज हिंदु नहीं थे, हम पर जबरन इस धर्म को थोपा गया था. हम अपने पुराने घर में पुन: लौटकर आए हैं. बौद्ध धर्म गुरु ने इस मौके पर कहा कि हम रावण के पुतले का बहिष्कार करते हैं. उनका कहना है कि जितने भी चमार धानुक धोबी हम लोग तो हिंदु है ही नहीं न ही हम भगवान राम को मानते हैं. हम लोग रावण के पुतले के दहन का विरोध करते आ रहे हैं, क्योंकि वो गलत इंसान नहीं था.

धर्म परिवर्तन कर बौद्ध धर्म अपना चुकी सुमन ने कहा कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी बड़े समाज के लोग हमें गाली देते हैं और गलत नजर से देखते हैं. हैंडपंप व कुएं में पानी भरने नहीं दिया जाता. स्कूलों में टीचर भेदभाव करते हैं, इन्हीं के चलते मैने धर्म परिवर्तन किया है.लोगो का कहना है कि आजादी के बाद भी दलित गुलामी की जिंदगी जी रहा है. विकास के नाम पर हमारे समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है. योगी सरकार के अफसरों ने बड़ी जतियों के घरों में टॉयलेट बनवा दिए, लेकिन दलितों के घर के बाहर आज भी शौचालय नहीं हैं. पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी तक ने दलितों के साथ भेदभाव किया है.

PM मोदी के गुजरात में भी 300 से अधिक हिन्दुओ ने अपनाया बौद्ध धर्म

अशोक विजय दशमी के मौके पर अहमदाबाद और वड़ोदरा में भी  300 से अधिक हिन्दू दलितों ने बौद्ध धर्म अपना लिया. गुजरात बौद्ध एकेडमी के सचिव रमेश बांकर ने बताया कि यहां संगठन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में करीब 200 दलितों ने बौद्ध धर्म में दीक्षा ली. इनमें 50 महिलाएं भी शामिल हैं.

बांकर ने बताया कि कुशीनगर उत्तर प्रदेश के बौद्ध धर्म के प्रमुख ने यहाँ दीक्षा दी. भगवान बुद्ध ने परिनिर्वाण प्राप्त करने के लिए कुशीनगर में ही अपने शरीर का त्याग किया था.

कार्यक्रम के संयोजक मधुसूदन रोहित ने बताया कि वड़ोदरा में एक कार्यक्रम में 100 से अधिक दलितों ने पोरबंदर के एक बौद्ध भिक्षु  द्वरा बौद्ध धर्म  की दीक्षा ली.

बसपा के क्षेत्रीय समन्वयक रोहित ने बताया कि 100 से अधिक लोगों ने स्वैच्छिक रूप से बौद्ध धर्म स्वीकार किया . हमने धर्मांतरण के लिए संकल्प भूमि वड़ोदरा  को चुना क्योंकि बाबासाहेब अंबेडकर ने छुआछूत के खिलाफ अपनी लड़ाई शुरू करने की खातिर अपनी नौकरी और शहर छोड़ने से पहले यहीं पर पांच घंटे बिताये थे.

उन्होंने कहा कि अशोक विजय दशमी उनके लिए इसलिए अहम है कि इसी दिन अंबेडकर ने 1956 में नागपुर में लाखों लोगों के साथ बौद्ध धर्म अपनाया था. अंबेडकर ने विजय दशमी का दिन इसलिए चुना कि इसी दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी.

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