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मैं 125 करोड़ भारतीयों की आस हूँ हाँ, मैं पागल हो चुका विकास हूँ

सोसल मीडिया पर इन दिनों PM मोदी पर कटाक्ष करती हुई एक कबिता वायरल हो रही है .जारी अज्ञात कबिता में मोदी पर जबरदस्त हमला हुआ है .

पढ़े पूरी कबिता ————-

मैं जुमला हूँ
प्रजातंत्र पर लगातार हो रहा हमला हूँ
मैं झूठ हूँ

छाया और फल विहीन पेड़ की ठूंठ हूँ
दंगों से मैली हुई गंगा हूँ
भ्रष्टाचार के हम्माम में नंगा हूँ
गाँव की लूट का इतिहास हूँ

खलिहान में पेड़ पर लटकी हुई किसान की लाश हूँ
सीमा पर खड़ा भूखा प्यासा जवान हूँ
मैं हिंदुस्तान की शान हूँ
मैं अज्ञात हूँ

सिर्फ उनके मन की बात हूँ
भय हूँ भ्रम हूँ
बेगार कर रहा श्रम हूँ
जानवरों से भी सस्ती मेरी जान है
फिर भी मेरे दिल में हिंदुस्तान है
मैं निर्भया हूँ

सड़कों, घरों और चौराहों पर
नोची-खसोटी बेची और खरीदी जा रही तुम्हारी ही बहन -बेटी -भार्या हूँ
मैं नोटबंदी हूँ
बाजार में आई हुई मंदी हूँ
मैं जीएसटी हूँ

करों के बोझ से टूट गई व्यापारियों के रीढ़ की हड्डी हूँ
मैं 125 करोड़ भारतीयों की आस हूँ
हाँ, मैं पागल हो चुका विकास हूँ
मैं पागल हो चुका विकास हूँ…..
-अज्ञात (वायरल कविता )

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