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बहुजन मीडिया पर बैन लगाने का जिम्मेदार कौन ,हिल रही मनुवादी मीडिया ?

बहुजन मीडिया हेतु संघर्ष के योद्धा बने वरिष्ठ पत्रकार,चिन्तक दिलीप मंडल

नई दिल्ली .देश में मनुवादियो का मीडिया में एक छत्र राज है ,सच को झूठ और झूठ को सच दिखाने का अदम्य साहस भी इन मीडिया घरानों में देखी जा सकती है.केंन्द्र और राज्य सरकारों का तलुआ चाटने में महारथ मीडिया घराने गुजरात में हार्दिक पटेल के आरक्षण मांगने सम्बन्धी आन्दोलन का खूब प्रचार किया ,ऐसा प्रचार मानो हर्दिक पटेल आरक्षण की मांग नहीं देश को तोडने की बात कर रहा है किन्तु जब केंद्र सरकार ने बिभिन्न जगहों पर दलितों ,पिछड़ो को मिलने वाले आरक्षण को कम किया ,सवर्णों पर मेहरबानी के फूल वर्षाए तो बिकाऊ ,नपुंसक मनुवादी मीडिया की आखे पथरा गई बस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गीत गाए जा रहे है,इन खबरों को ऐसा घोटा गया मानो देश में कुछ हुआ ही नहीं किन्तु जब इन मीडिया घरानों को चुनौती देने ,इनके द्वारा दबाई जा रही खबरों को कुरेदने हेतु बहुजनो ने अपना मीडिया प्लेटफार्म विकसित किया लाखो लोगो की आवाज बनकर सैकड़ो बहुजन मीडिया खड़े हुए और दबी खबरों को कब्र से निकाल बहुजन मीडिया ने स्थान दिया तो इन मीडिया घरानों की नीव हिल गई .लोग बड़े बड़े मीडिया घरानों को कोसने लगे यहा तक कहा जाने लगा कि बड़े मीडिया घरानों के मालिकान सरकार के हाथो की कठपुतली बन चुके है .

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बहुजनो द्वारा संचालित मीडिया प्लेटफार्म की खबरों को महत्ता मिली मीलियन में लोग बहुजन मीडिया की खबरों को विस्वास में लेने लगे ,बहुजनो की खबरों पर आंदोलनों ने जन्म लेना प्रारम्भ कर दिया ,बहुजन मीडिया की सार्थकता को सिद्ध करता है.बड़े मीडिया घरनो के लोग अब इस नियति पर उतर आए ही कि बहुजन मीडिया की आवाज को दबाया कैसे जाय ,बहुजन मीडिया आज इन दल्ले मीडिया घरानों के लिए खतरा बन कर उभर रहे है,जिस कारण मीडिया का मनुवाद हिल रहा है .

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हिल रहे मनुवाद को रोकने हेतु आज पुनः मनुवादी एक हो गए है ,मिलकर बहुजन मीडिया को जमींदोज करने का खद्यन्त्र कर रहे है ,बहुजन मीडिया के नेशनल जनमत ,नेशनल दस्तक ,न्यूज़ अटैक तक के फेसबुक पेज ब्लाक कर दिए गए है ,फिर भी बहुजन समाज द्वरा संचालित मीडिया मूल निवासीयों की कड़ी परिश्रम क फल है जो बिकाऊ नहीं ही ,निर्वाध गति से चलता रहेगा ,अब इस दिशा में बहुजन संघर्ष को भी तैयार है .

संघर्ष की शुरूवात वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल जी ने कर दिया है देखे …..

ये जो सज्जन टीका लगाए बैठे हैं वे Umang Bedi हैं. फेसबुक के भारत और दक्षिण एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर. भारत में फेसबुक पर जो भी होता है, उसका श्रेय भी इनका और जो गलत होता है, उसकी जिम्मेदारी भी इनकी.

यह 3 जून, 2017 की तस्वीर है. पूजा चल रही है. पंडित बिजी है. बेदी जी के सिर पर फूल चढ़ाया जा चुका है. भक्ति का माहौल है । अगर आप सोच रहे हैं कि यह बेदी जी का गृह प्रवेश है या उनके घर पर सत्यनारायण की कथा चल रही है, तो आप गलत हैं । बेदी जी यह पूजा फेसबुक के मुंबई के नए दफ्तर में करवा रहे हैं. दफ्तर बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में है।
भारत में मॉडर्निटी का यह अद्भुत रूप है. यह बहुत मिलावटी तरीके से आया है. अमेरिका या यूरोप में आप किसी कॉरपोरेट ऑफिस के उद्धाटन में यह कल्पना नहीं कर सकते हैं कि मैनेजिंग डायरेक्टर पादरी को बुलाकर प्रार्थना सभा करवा रहा है ।
पश्चिम में आधुनिकता चर्च से टकराकर बढ़ी है. गैलीलियो से लेकर ब्रूनो और कॉपरनिकस ने इसके लिए चर्च से पंगा मोल लिया और कीमत चुकाई. ब्रूनो को तो चर्च ने जिंदा चौराहे पर जला दिया । पश्चिम में धर्म व्यक्ति का निजी मामला है.।

भारत में आधुनिकता अजीब तरह से आई है. यहां कोट के नीचे जनेऊ का गंदा धागा जिंदा है। यहां डॉट कॉम का कम्युनिटी मेट्रिमोनी डॉट कॉम बन जाता है.

मिस्टर उमंग बेदी गोल्फ खेलते हैं, सबसे आधुनिक टेक्नोलॉजी पर काम करते हैं,, कहने को नारी अधिकारों के संरक्षक भी हैं, और इसके साथ सत्यनारायण व्रत कथा ऑफिस के अंदर कराने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं है.
इसलिए बेदी जी के व्यवहार को भारतीय आधुनिकता की समस्या के रूप में देखें.

बहुजन समाज पार्टी के बाद राजद भी बहुजन मीडिया के साथ ,

(वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सी मण्डल की वाल से)

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