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योगी राज : पेंशन के लिए दर-दर भटकती बुजुर्ग महिलायें

बीघापुर,उन्नाव। सरकार द्वारा बनाए गए नियम कानून कभी-कभी हास्यास्पद लगते हैं। भले ही उन कानूनों का उद्देष्य समाज से भ्रश्टाचार खत्म करने का ही क्यों न हो।हम बात कर रहे हैं विधवा व वृद्धावस्था पेंशन की। विधवा पेंशन पाने के लिए एक विधवा को अपने पति की मृत्यु का प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक खाता आदि इकट्ठा करने के बाद आवेदन को आन लाइन करवाने के बाद समस्त कागजात समाज कल्याण विभाग के कार्यालय में जमा करना होता है।

यहीं पर एक बड़ा सवाल और है कि आनलाइन प्रक्रिया के बाद आवेदक को भौतिक रूप से कागजात फिर कार्यालय में जमा करने होते हैं।वहीं एक 60वर्श के बुजुर्ग को भी वृद्धा अवस्था पेंषन प्राप्त करने के लिए लगभग इसी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।अब सवाल उठता है कि क्या एक विधवा और 60 वर्श के बुजुर्ग के लिए यह सारी प्रक्रियाएं आसान हैं? अधिकतर पात्र अपढ़ भी हैं,और असाहाय भी।जिनके पास न तो कोई उनकी सेवा करने वाला है और न इस कागजों को बनवाने के लिए पैसे ही हैं।साथ ही परिवार रजिस्टर की नकल लेने के लिए एक बुजुर्ग को कार्यालय के दर्जनों चक्कर भी लगाने पड़ते हैं, फिर भी उन्हें कागज नहीं मिल पाते। अब सरकार ही बताए क्या ऐसे में इन पात्र असाहायों को योजनाओं का लाभ मिल पाएगा?इसी का फायदा गांवों में दलाल उठाते हैं जो बुजुर्गों व विधवाओं का कागज बनवाने के नाम पर षोशण करते हैं।मंगलवार को इस उम्मीद से ब्लाक मुख्यालय गंगा कटरी के भीखीखेड़ा से आईं कुसमा देवी व रज्जनि की उम्मीदों पर पानी तब फिर गया जब ब्लाक कर्मचारियों द्वारा उपरोक्त कागजात बनवाने की बात कही गई,जब कि उन वृद्धाओं को यह भी नहीं पता कि कागजात बनते कहां हैं।अब ऐसे में सरकार के खजाने तो भरे हैं लेकिन तरबतर बगिया के माली पेड़ सूखे हैं,अन्न के भण्डार हैं और लोग भूखे हैं,फल लगे जो दिख रहे ऊँचे दरख्तों पर, रस भरे बाहर से हैं अन्दर से सूखे हैं।

रिपोर्ट: डॉ. मान सिंह

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