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दलित मुस्लिमों को ‘देश विरोधी’ बताने वाली JNU की प्रोफेसर अमिता सिंह को केंद्र सरकार का उपहार

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार के लिए दलित और मुस्लिम विरोधी करने वाला व्यक्ति कितना अहम है इसका उदाहरण जेएनयू की प्रोफेसर की प्रोग्रेस से समझ सकते हैं। दलित और और मुस्लिमों को ‘देश विरोधी’ बताने वाली जेएनयू की प्रोफेसर अमिता सिंह को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद के सदस्य के तौर पर चुना है। अमिता सिंह के साथ 12 अन्य लोगों को भी सदस्य के तौर पर चुना गया है।

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सनद रहे अमिता सिंह वही प्रोफेसर हैं जिन्होंने पिछले साल कहा था कि सभी दलित और मुस्लिम ‘देश विरोधी’ होते हैं। अमिता सिंह के इस बयान के बाद काफी बवाल हुआ था। अमिता ने बाद में सफाई देते हुए कहा था कि उनके बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया गया। समाज विज्ञान में शोध को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने 1969 में भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद की स्थापना की थी। अब अमिता सिंह भी उसकी सदस्य बन गई हैं।

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भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद संस्थानों एवं विद्वानों को अनुदान देने और समाज विज्ञान के क्षेत्र में शोध में प्रगति की समीक्षा करने का काम करता है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पिछले महीने मानव विज्ञानी बृज बिहारी कुमार को भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषदका अध्यक्ष नियुक्त किया था। कुमार की नियुक्ति के बाद भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद में सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज हुई।


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सूत्रों के मुताबिक भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद के अध्यक्ष ने परिषद के सदस्यों के तौर पर चयन के लिए 13 नाम भेजे थे और मंत्रालय ने उन्हें मंजूरी दे दी है। जिन लोगों को परिषद का सदस्य चुना गया है, उनमें जेएनयू की प्रफेसर अमिता सिंह, दिल्ली यूनिवसर्टिी के प्रोफेसर अश्विनी महापात्र, इंडिया पॉलिसी फाउंडेशन के मानद निदेशक राकेश सिन्हा और बिहार यूनिवसर्टी के कुलपति एच सी एस राठौड़ शामिल हैं। पुणे यूनिवसर्टी की प्रोफेसर शांतिश्री पंडित, प्रबंधन के प्रोफेसर पी कांगासभापति, अर्थशास्त्र के प्रोफेसर संजय सत्यार्थी, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के भाषा-विज्ञानी पंचानन मोहंती, महिला शिक्षाविद के एस खोब्रागडे, टी एस नायडू, पी वी कृष्णा भट और एच एस बेदी को भारतीय समाज विज्ञान शोध परिषद में सदस्य नियुक्त किया गया है।

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जेएनयू के सेंटर ऑफ लॉ ऐंड गवर्नेंस की प्रमुख अमिता सिंह ने पिछले साल हुए राजद्रोह विवाद के दौरान कथित तौर पर यह बयान देकर हंगामा खड़ा कर दिया था कि दलित और मुस्लिम ‘ ‘देश विरोधी’ होते हैं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस मामले में जेएनयू को नोटिस भी जारी किया था।

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