You are here

आरक्षण मुद्दा : आपके बच्चे खतरे में हैं,चिंतित बरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल

सीबीएसई ने नीट में सवर्णों छात्रों को आऱक्षित कर दिया है. इसे लेकर एक व्यापक बहस शुरू हो चुकी है. इस कदम को आरक्षण खत्म करने की शुरूआत के तौर पर देखा जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद सीबीएसई ने देशभर में इसे लागू कर दिया है. इसके अनुसार आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार चाहे सबसे ज्यादा नंबर ले आए लेकिन वह सिर्फ आरक्षित कोटे में ही नौकरी पाएगा यानि सवर्णों के लिए 50.5 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था मुक़र्रर कर दी गई है.

इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने लिखा है…

अपने बच्चों को बचाओ!

SC, ST, OBC के ख़िलाफ़ आज़ादी के बाद का यह सबसे बड़ा फ़ैसला है, लेकिन हम चुप हैं, क्योंकि हम एक मरे हुए समाज के नागरिक हैं! यह मान लेने में कोई हर्ज नहीं है।बाबा साहेब ने कारवाँ को जहाँ तक पहुँचाया था, वह पीछे जा रहा है.आने वाली पीढ़ी हमें गालियाँ देंगी कि हम कितने रीढविहीन थे.


क़लम की नोक पर एक झटके में SC, ST, OBC के नौ हज़ार स्टूडेंट्स इस साल डॉक्टर बनने से रह जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि 50.5% सीटों पर SC, ST, OBC का कोई नहीं आ सकता. जनरल मेरिट में टॉपर हो तो भी नहीं.

केंद्र सरकार इसके ख़िलाफ़ अपील करने की जगह, तत्परता से इसे लागू कर रही है.मामला सिर्फ़ मेडिकल का नहीं है. आगे चलकर यह आदेश इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और यूपीएससी और पीसीएस तक आएगा. कई राज्यों में यह पहले से लागू है. लाखों स्टूडेंट्स पर असर पड़ेगा.

मुझे नहीं मालूम कि समाज की नींद कैसे खुलेगी. हमारे पॉलिटिकल क्लास की चिंताओं में यह कैसे शामिल हो पाएगा.जो नेता इस मुद्दे को उठाएगा, उस पर फ़ौरन भ्रष्टाचार का केस लग जाएगा. क्या हम उस नेता के साथ खडें होंगे? अगर नहीं, तो कोई नेता जोखिम क्यों लेगा?

मात्र पाँच हज़ार लोग भी सड़कों पर आ जाएँ, सारे लोग अपने जनप्रतिनिधियों पर दबाव डालें, तो आपके समाज के लाखों बच्चों का भविष्य बच जाएगा.

लेकिन क्या आप अपने बच्चों को बचाना चाहते हैं?

(खबर कैसी लगी बताएं जरूर. आप हमें फेसबुक, ट्विटर और गूगल प्लस पर फॉलो भी कर सकते हैं.)




loading…


इसे भी पढ़े -