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बिजली विभाग की लापरवाही से हाथ –पैर गवां चुके बच्चो को 60-60 लाख के मुवावजे का हाईकोर्ट ने दिया आदेश

लखनऊ .बिजली बिभाग की लापरवाही के कारण जून 2011 के हृदय विदारक दुर्घटना में बिजली का करंट लगने से अपने दोनों हाथ और एक-एक पैर गंवा चुके बच्चों को 60-60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिया है. न्यायालय ने बिजली विभाग के प्रबंध निदेशक को बच्चों के कृत्रिम अंग लगवाने पर महानिदेशक, स्वास्थ्य के साथ विचार-विमर्श करने और साथ में अभिभावकों को भी चार-चार लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश बिजली विभाग को दिया है.

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यह आदेश न्यायमूर्ति एसएन शुक्ला और न्यायमूर्ति एसके सिंह (प्रथम) की खंडपीठ ने 14 वर्षीय अंकित कुमार यादव और 12 वर्षीय यशपाल सिंह की याचिका पर दिए.जून 2011 में दोनों बच्चों के साथ बिजली विभाग की लापरवाही की वजह से हादसा हुआ था. बच्चे चिनहट थानांतर्गत गौरव विहार कॉलोनी में शाम को खेल रहे थे. इसी दौरान वे 11 केवी की ट्रांसमिशन लाइन की चपेट में आ गए जो कॉलोनी के ही एक घर को छूटी हुई गुजर रही थी. बच्चों को आनन-फानन में परिजनों द्वरा ट्रामा सेंटर ले जाया गया जहां यशपाल और अंकित के दोनों हाथ और एक-एक पैर डॉक्टरों ने काट कर बच्चो की जान बचाया .बच्चों की ओर से बिजली विभाग से मुआवजा देने की गुहार लगाई गई लेकिन विभाग ने इंकार कर दिया. तत्कालीन बिजली मंत्री नेम भी इन बच्चो की फरियाद को अनसुना कर दिया .

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पीड़ित अंकित यादव के परिवार की स्थिति काफी नाजुक है ,पिता की मौत के बाद अंकित ही इस परिवार का सहारा था , घर में मां व दो बहनें हैं,जिनकी उम्र शादी करने की हो गई है .इस परिवार के कमाई का कोई जरिया नहीं है .

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि रामा डिग्री कॉलेज को सप्लाई देने के लिए वहां 11 केवी की लाइन लगाई गई थी जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध भी किया था. न्यायालय के आदेश पर निदेशक, विद्युत सुरक्षा ने अपनी जांच में पाया कि हाई टेंशन लाइन लगाने में नियमों की अवहेलना हुई है . न्यायालय ने अपने विस्तृत आदेश में विद्युत विभाग को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार पाया.

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न्यायालय ने दोनों बच्चो को 60-60 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है. जिसका 50-50 फीसदी दोनों के अलग-अलग खातों में जमा किया जाएगा. खाते माता-पिता व बच्चे के संयुक्त खाते होंगे व उक्त धनराशि पर बच्चों के बालिग होने पर पूर्ण अधिकार होगा, बाकी के 50-50 फीसदी धनराशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में लम्बी अवधि के एफडी में जमा की जाएगी जिसका ब्याज बच्चों के खाते में जाएगा.जो उसी बैंक में उनके अभिभावकों के साथ संयुक्त खाते होंगे. न्यायालय ने चार-चार लाख अभिभावकों को भी बतौर मुआवजा देने के आदेश दिए. बच्चों के कृत्रिम अंग लगाने के लिए प्रबंध निदेशक डीजी, स्वास्थ्य से विचार-विमर्श कर जरूरी कदम उठाएंगे.

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न्यायालय ने बिजली विभाग के प्रबंध निदेशक को विशेषज्ञों और इंजीनियरों की एक टीम बनाकर रिपोर्ट तैयार कराने के भी आदेश दिए जिसमें बिजली से होने वाले हादसों को कम करने के उपाय बताया जाय . न्यायालय ने कहा कि आबादी के नजदीक से गुजरने वाले हाई टेंशन लाइन के सम्बंध में सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं.
शर्मनाक यह रहा कि दो बच्चों के साथ इतना बड़ा हादसा होने के बावजूद बिजली विभाग ने अपने स्तर मुआवजा देने से इंकार किया ही, इसके अलावा वह अंतिम तक मुआवजा न देने के लिए भी हाईकोर्ट में जूझता रहा. एमडी, मध्यांचल विद्युत वितरण यूनिट ने अलग से जवाबी हलफनामा दाखिल करते हुए कहा कि पॉवर कॉर्पोरेशन के 19 जून 2008 के नोटिफिकेशन के अनुसार बिजली का करंट लगने से किसी की जान जाने पर मुआवजा के तौर पर एक लाख रुपये दिए जाने का प्रावधान है. याचियों को यह रकम दी जा चुकी है.

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